मंगलवार, 23 जनवरी 2018

पद्मावत के प्रदर्शन पर रोक लगाने की मांग को लेकर घेरा कलेक्ट्रेट

* राजधानी भोपाल सहित पूरे प्रदेश में जारी है विरोध, प्रदर्शन
मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल सहित प्रदेशभर में पद्मावत के प्रदर्शन पर रोक लगाने की मांग को लेकर प्रदर्शन जारी हैं. सुप्रीम कोर्ट द्वारा मध्यप्रदेश सरकार की याचिका खारिज किए जाने के बाद आज करणी सेना एवं अन्य संगठनों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रदर्शन कर घेराव कर डाला. 
प्रदेश में पद्मावत फिल्म को लेकर बढ़ते विरोध को देखते हुए राज्य सरकार सर्वोच्च न्यायालय गई थी, लेकिन न्यायालय ने आज मंगलवार को पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी. न्यायालय द्वारा याचिका खारिज किए जाने के बाद राजधानी भोपाल में करणी सेना, राजपूत समाज सहित हिंदूवादी संगठनों के कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए और उन्होंने जिलाधिकारी कार्यालय में डेरा डाल दिया. प्रदर्शन में महिलाएं भी शामिल थीं. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे किसी भी कीमत पर इस फिल्म को सिनेमाघरों में नहीं चलने देंगे. करणी सेना के पदाधिकारियों ने कहा कि हम प्रदेश में कहीं भी फिल्म का प्रदर्शन नहीं होने देंगे. उनका कहना है कि हमारा आंदोलन जारी रहेगा. वे सर्वोच्च न्यायालय के फैसले से संतुष्ट नहीं हैं. करणी सेना के अलावा राजधानी में राजपूत समाज के प्रतिनिधियों ने ज्योति टाकीज के पास प्रदर्शन किया और चेतावनी दी कि यदि फिल्म का प्रदर्शन किया गया तो गंभीर नतीजे भुगतने होंगे. इसी तरह इंदौर में प्रदर्शनकारियों ने कई स्थानों पर टायर चलाकर अपना विरोध जताया. राजधानी भोपाल के अलावा प्रदेश के इंदौर, ग्वालियर, रतलाम, झाबुआ, मुरैना, उज्जैन सहित अन्य शहरों में करणी सेना एवं राजपूत समाज द्वारा पद्मावत फिल्म के प्रदर्शन को लेकर किया जा रहा विरोध आज मंगलवार को भी जारी रहा. करणी सेना के कार्यकर्ताओं ने कहीं पर सड़कों पर प्रदर्शन किया तो कहीं पर टायर जलाकर विरोध जताया.
एक बार फिर दायर करेंगे याचिका
सुप्रीम कोर्ट के इंकार किए जाने के बाद मध्य प्रदेश सरकार एक बार फिर पुनर्विचार याचिका दायर करेगी. सुप्रीम कोर्ट ने पद्मावत पर बैन लगाने को लेकर राजस्थान और मध्य प्रदेश सरकार की याचिकाओं को खारिज कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राजधानी में पत्रकारों से चर्चा करते हुए  मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सरकार पुनर्विचार याचिका दायर करेगी. उन्होंने कहा कि ये सिर्फ लॉ एंड आर्डर का मामला नहीं है, बल्कि लोगों की भावनाओं से जुड़ा सवाल है. 

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