मध्यप्रदेश के श्योपुर जिले में वर्ष 2016 में जिन आदिवासी बच्चो के साथ कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक ने फोटो खिचवाई थी. वह बच्चे अपने मां-बाप के साथ 2 जनवरी को जनसुनवाई में श्योपुर पहुंचे तो कलेक्टर उनकी समस्या का निराकरण करने उनके गांव सिलोरी पहुंच गये और समस्या के संबध में राजस्व अधिकारियों को सख्त हिदायत दी. इस प्रकार प्रदेश सरकार द्वारा शुरू किया गया जनसुनवाई कार्यक्रम आम लोगों की समस्याओ के त्वरित निदान में सहायक हो रहा है.
श्योपुर जिले के वनाचंल में बहने वाली कूनो नदी के किनारे पहाड़ी के नजदीक बसे सिलोरी एवं नवलपुरा ग्रामों में दो साल पहले तक जाने का कोई रास्ता नहीं था. तब कलेक्टर पीएल सोलंकी एवं तत्कालीन पुलिस अधीक्षक सुनील कुमार पाण्डे पोहरी के रास्ते होकर बासेड पंचायत के इन गांवो में 5 किलोमीटर पैदल चलकर पहुंचे थे तथा कूनो नदी को पार कर वापस आये थे. इस दौरान सिलोरी गांव के मुहाने पर कूनो नदी के किनारे अपने छोटे से खेत में झोपड़ी बनाकर रहने वाले राजाराम आदिवासी के परिवार के साथ चर्चा के लिए रूके थे. तब वही मक्का के खेत में रख वाली के लिए बनाई गई मचान पर बैठे बच्चो विक्की और प्रीति के साथ फोटो खिचवाई थी और उनके खेत पर बैठकर भुटिया खाने का स्वाद भी लिया था. दो साल बाद गत 2 जनवरी 2018 को जनसुनवाई के दौरान दोनो बच्चे अपने माता पिता राजाराम आदिवासी एवं गुड्डी आदिवासी के साथ कलेक्टर पीएल सोलंकी के समक्ष पहुंचे तो बच्चों के माता पिता ने बताया कि साहब आप हमारे घर आये थे और मचान पर बच्चो के साथ फोटो खिचवाया था. अब हमारी झोपड़ी को उजाड़ने तथा खेती से बेदखल करने का प्रयास कुछ लोगों द्वारा किया जा रहा है. इस पर कलेक्टर सोलंकी ने बच्चो को पहचानते हुए उनसे उनकी पढ़ाई लिखाई के बारे में जानकारी ली गई तथा कहा कि तुम अपने माता पिता के साथ घर जाओ, गांव में आकर ही तुम्हारी समस्या का निराकरण किया जायेगा. इसके पश्चात कलेक्टर सोलंकी 11 जनवरी को राजस्व अधिकारियो की टीम के साथ सिलोरी गांव पहुचें तथा अफसरों को हिदायत दी कि इन्हें जमीन से बेदखल न होने दिया जाये. दरअसल कूनो नदी के किनारे बने बीहडो को समतल करके कुछ लोगो द्वारा खेती की जा रही है. जिसका रकवा 80 बीघा के लगभग है. इसी भूमि के पास राजाराम आदिवासी की भूमि है जिस पर वह 10 साल से खेती करके गुजर बसर कर रहा है. कुछ लोगो द्वारा उसे अपनी जमीन बताकर उसे जमीन से हटने के लिए परेशान किया जा रहा है. इसी मामले को लेकर वह जनसुनवाई में पहुचा था. शासन का जनसुनवाई कार्यक्रम लोगो की समस्याओ के निराकरण में न केवल सहायक सिद्ध हो रहा है बल्कि यह एक ऐसा माध्यम है जहां कोई भी व्यक्ति निर्धारित दिन मंगलवार को सीधे आकर कलेक्टर से मिल सकता है और अपनी बात रख सकता है.
श्योपुर जिले के वनाचंल में बहने वाली कूनो नदी के किनारे पहाड़ी के नजदीक बसे सिलोरी एवं नवलपुरा ग्रामों में दो साल पहले तक जाने का कोई रास्ता नहीं था. तब कलेक्टर पीएल सोलंकी एवं तत्कालीन पुलिस अधीक्षक सुनील कुमार पाण्डे पोहरी के रास्ते होकर बासेड पंचायत के इन गांवो में 5 किलोमीटर पैदल चलकर पहुंचे थे तथा कूनो नदी को पार कर वापस आये थे. इस दौरान सिलोरी गांव के मुहाने पर कूनो नदी के किनारे अपने छोटे से खेत में झोपड़ी बनाकर रहने वाले राजाराम आदिवासी के परिवार के साथ चर्चा के लिए रूके थे. तब वही मक्का के खेत में रख वाली के लिए बनाई गई मचान पर बैठे बच्चो विक्की और प्रीति के साथ फोटो खिचवाई थी और उनके खेत पर बैठकर भुटिया खाने का स्वाद भी लिया था. दो साल बाद गत 2 जनवरी 2018 को जनसुनवाई के दौरान दोनो बच्चे अपने माता पिता राजाराम आदिवासी एवं गुड्डी आदिवासी के साथ कलेक्टर पीएल सोलंकी के समक्ष पहुंचे तो बच्चों के माता पिता ने बताया कि साहब आप हमारे घर आये थे और मचान पर बच्चो के साथ फोटो खिचवाया था. अब हमारी झोपड़ी को उजाड़ने तथा खेती से बेदखल करने का प्रयास कुछ लोगों द्वारा किया जा रहा है. इस पर कलेक्टर सोलंकी ने बच्चो को पहचानते हुए उनसे उनकी पढ़ाई लिखाई के बारे में जानकारी ली गई तथा कहा कि तुम अपने माता पिता के साथ घर जाओ, गांव में आकर ही तुम्हारी समस्या का निराकरण किया जायेगा. इसके पश्चात कलेक्टर सोलंकी 11 जनवरी को राजस्व अधिकारियो की टीम के साथ सिलोरी गांव पहुचें तथा अफसरों को हिदायत दी कि इन्हें जमीन से बेदखल न होने दिया जाये. दरअसल कूनो नदी के किनारे बने बीहडो को समतल करके कुछ लोगो द्वारा खेती की जा रही है. जिसका रकवा 80 बीघा के लगभग है. इसी भूमि के पास राजाराम आदिवासी की भूमि है जिस पर वह 10 साल से खेती करके गुजर बसर कर रहा है. कुछ लोगो द्वारा उसे अपनी जमीन बताकर उसे जमीन से हटने के लिए परेशान किया जा रहा है. इसी मामले को लेकर वह जनसुनवाई में पहुचा था. शासन का जनसुनवाई कार्यक्रम लोगो की समस्याओ के निराकरण में न केवल सहायक सिद्ध हो रहा है बल्कि यह एक ऐसा माध्यम है जहां कोई भी व्यक्ति निर्धारित दिन मंगलवार को सीधे आकर कलेक्टर से मिल सकता है और अपनी बात रख सकता है.

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