रविवार, 21 जनवरी 2018

शिक्षा की रोशनी का दामन थामा और स्वालंबन बनी महिलाएं

 कहते हैं शिक्षा सुख, समृद्धि और प्रगति का मार्ग प्रशस्त करती है, इसी उक्ति को शहडोल जिले के ग्राम पंचायत खैरहा की महिलाओं ने चरितार्थ किया है. गांव की महिलाएं अब घर का चूल्हा, चौका, खेत और आंगन तक ही सीमित नहीं है बल्कि महिलाओं ने शिक्षा की रोशनी का दामन थामकर स्वावलंबन और प्रगति की ओर अपना कदम बढ़ाया है. ग्राम पंचायत खैरहा की चंद्रवती विश्वकर्मा सहित अन्य महिलाओं ने साक्षरता कक्षाओं में न केवल अक्षर ज्ञान प्राप्त किया है बल्कि शिक्षित होकर उन्नत सब्जी की खेती, मुर्गी पालन, सिलाई-कढ़ाई जैसी गतिविधियां सीखकर स्वावलंबन की ओर कदम बढ़ाया है. ग्राम पंचायत खैरहा की चंद्रवती विश्वकर्मा सहित अन्य महिलाओं ने बताया कि उन्हें पढ़ना-लिखना नहीं आता था, वर्ष 2013 में गांव में साक्षरता प्रेरक कुमारी कीर्ति ने उन्हें रात्रिकालीन साक्षर भारत की कक्षाओं पढ़ने के लिये प्रोत्साहित किया. कीर्ति के प्रोत्साहित करने पर मेरे सहित अन्य महिलाओं ने साक्षरता कक्षाओं में जाना प्रारंभ किया. साक्षरता कक्षाओं में जाकर हमने पढ़ना प्रारंभ किया, पढ़ाई प्रारंभ हुई तो हम लोगों में नये विचार भी आने लगे.  एक दिन प्रेरक ने उन्हें सुझाव दिया कि वे शिक्षा ग्रहण करने के साथ-साथ स्वसहायता समूह से जुड़कर सिलाई, कढ़ाई, पशु पालन, सब्जी की खेती, मुर्गी पालन आदि गतिविधियां प्रारंभ कर आर्थिक रूप से स्वावलंबी बन सकती हैं. साक्षरता प्रेरक के समझाईस देने पर उन्होने साक्षरता कक्षाओं में सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण भी प्राप्त किया और सिलाई मशीन लेकर सामूहिकतौर से सिलाई और कढ़ाई का कार्य प्रारंभ किया जिससे उन्हें आमदनी होने लगी. उन्होने बताया कि वर्ष 2014 में साक्षरता परीक्षाओं का परिणाम आया जिसमें वह एवं साथ की महिलाओं ने ह्यअह्ण ग्रेड में परीक्षा उत्तीर्ण की जिससे उत्साहित होकर महिलाओं ने सिलाई-कढ़ाई के काम को और अधिक पारंगत होकर करना शुरू किया. जिसका परिणाम यह हुआ कि गांव के साथ-साथ अब हमें दूसरे गांव से भी सिलाई का काम मिल रहा है. श्रीमती चंद्रवती विश्वकर्मा ने बताया कि साक्षरता प्रेरक की समझाईस पर साक्षरता कक्षाओं की महिलाओं ने स्वयं स्व-सहायता समूह बना लिया है तथा बैंक से रियायती दर पर ऋण लेकर सब्जी उगाने का कार्य, मुर्गी पालन का कार्य भी प्रारंभ कर दिया है. इसके अलावा स्कूल में खाना बनाने का भी कार्य प्रारंभ किया है. इससे हमारी आमदनी बढ़ गई है. उन्होने बताया कि साक्षरता प्रेरक कुमारी कीर्ति के प्रेरणा देने से वे आज शिक्षित हो गई हैं और आर्थिक सशक्तीकरण की दिशा में महिलाओं ने कदम बढ़ाया है.

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