अनूपपुर जिले के किसान अब कृषि उत्पादन अधिक प्राप्त करने के लिए नई कृषि तकनीकों के साथ-साथ उन्नत बीजों का उपयोग कर दुगुना उत्पादन प्राप्त कर रहे हैं. जिले में कृषि विस्तार सुधार कार्यक्रम के तहत आत्मा परियोजना द्वारा यह पहल शुरू की गयी हैं. भारत सरकार एवं राज्य सरकार की मनसा अनुसार 2022 तक किसानो की आय दुगनी करने के सपने को साकार करने की मुहिम के तहत अनूपपुर जिले में आत्मा परियोजना एवं कृषि क्षेत्र के मैदानी अमले के द्वारा कोतमा, जैतहरी, अनूपपुर एवं पुष्पराजगढ जनपदों के 8 किसानो का उद्यानिकी क्षेत्र में चयन किया गया. उनके द्वारा मटर की उन्नत किस्म ह्यह्यगोल्डन पर्लह्यह्य की बुवाई .100 हे. क्षेत्र में कराया गया है. इसके लिये लाइन से लाइन की दूरी 15 सेमी. एवं पौधे से पौधे की दूरी 10 सेमी. रखी गई, जिससे बीज की मात्रा कम लगी एवं उत्पादन अधिक होने एवं अप्रत्यक्ष रूप से मृदा का स्वास्थ्य भी सही रहता है. लाइन से लाइन एवं पौधे से पौधे की दूरी एक निश्चित दूरी पर होने के कारण पानी एवं खाद की बचत भी होती है. गोल्डन पर्ल जहॉ एक ओर अधिक उत्पादन देती है वही खाने में मिठास लिये हुये होती है. लागत कम करने एवं उत्पादन अधिक प्राप्त करने की दिशा में यह एक सफल प्रयास रहा. आत्मा परियोजना एवं कृषि विभाग के क्षेत्रीय अधिकारियो द्वारा समय-समय पर किसानो को मार्गदर्शन देने एवं उत्पादन की लागत कम करने हेतु दिशा निर्देश दिया गया. विकासखण्ड कोतमा में कृषक सुशीला बाई पहले अपने खेतो में मटर की खेती में घर के पुराने बीज का उपयोग कर परम्परागत रुप से करती रही हैं. उससे एक पौधे से 150-200 ग्राम मटर प्राप्त होती थी, आज वही कृषक सुशीला बाई उन्नत तकनीकी एवं जैविक खाद का उपयोग करते हुये विभाग द्वारा प्रदाय किये गये मटर के किस्म गोल्डन पर्ल की खेती कर रही है जिसके माध्यम से एक पौधे से 400-500 ग्राम मटर प्राप्त कर रही हैं. मटर फली में जहॉ पहले 3 से 4 दाने आते थे वही इस मटर में 10 से 12 दाने प्रत्येक फली से प्राप्त हो रहे है. इस तरह उन्नत उत्पादन से अच्छी दर प्राप्त होने से लाभ भी अधिक प्राप्त हो रहा है.

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