शनिवार, 16 जून 2018

ई-टेंडर घोटाले दबाने के लिए करवायी जा रही ईओडब्ल्यू जांच


प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने कहा है कि ई-टेंडर टेम्परिंग घोटाले के प्रारंभिक चरण में जल निगम की नल-जल समूह योजना के तहत गांवों में पानी पहुंचाने के लिए बनी परियोजना के 1000 करोड़ के तीन टेंडरों की गड़बड़ी का मामला सामने आया था, जिसमें से दो परियोजनाओं का शिलान्यास प्रधानमंत्री इसी माह करने वाले हैं. 
कमलनाथ ने कहा कि लेकिन अब जल निगम के अलावा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, जल संसाधन, महिला बाल विकास, लोक निर्माण, नगरीय विकास एवं आवास विभाग तथा मध्यप्रदेश रोड डेवलपमेंट कार्पोरेशन और नर्मदा घाटी विकास सहित अन्य कई विभागांे में भी टेंडरों में गड़बड़ी की बातें सामने आ रही हैं. इन विभागों के ई-टेंडर भी संदेह के घेरे में आ चुके हैं. 
कमलनाथ ने कहा कि घोटाले की जांच ईओडब्ल्यू को दी गई है, जबकि वह तकनीकी जांच में सक्षम न होकर सरकार के अधीन है. इसलिए उससे निष्पक्ष जांच की उम्मीद नहीं की जा सकती. इस घोटाले पर लीपा-पोती व पर्दा डालने के लिए ही यह जांच करवायी जा रही है. जबकि निष्पक्ष जांच के लिए इस घोटाले को सीबीआई को सौंपा जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि जांच के बाद यह घोटाला लाखों, करोड़ों का होकर प्रदेश के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा घोटाला होगा.
कमलनाथ ने कहा कि बड़े आश्चर्य की बात है कि प्रदेश के मुखिया शिवराजसिंह इन गड़बडि़यों के सामने आने के बाद पिछले छह दिनों से इस मामले में मौन हैं. पूरी सरकार इस मामले को रफा-दफा करने में जुट गई है, जबकि यह मामला बेहद गंभीर है. पूरा ई-प्रोक्योरमंेट सिस्टम कटघरे में आ गया है. 
कमलनाथ ने कहा कि सरकार ई-टेंडर व्यवस्था को भ्रष्टाचार खत्म करने के लिए लायी थी, लेकिन इसमें भी भ्रष्टाचार खोज लिया गया. सरकार के संरक्षण मंे बड़े रसूखदारों को फायदा पहुंचाकर प्रदेश के खजाने को जमकर चूना लगाया गया है. निष्पक्ष व उच्चस्तरीय जांच से ही असली व वास्तविक दोषी सामने आयेंगे. 

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