प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने कहा है कि शिवराज सरकार पूरे प्रदेश में तेंदूपत्ता संग्राहकों और असंगठित श्रमिकों के नाम पर जन कल्याण (संबल) योजना के सम्मेलन प्रदेश भर मंे जनपद पंचायत स्तर से लेकर विभिन्न स्तर पर कर रही है.
उन्होंने कहा कि इन सम्मेलनों के नाम पर करोड़ों रूपयों का खर्च सरकारी खजाने से किया जा रहा है, इनके प्रचार-प्रसार पर भी जमकर सरकारी खजाने को लुटाया जा रहा है. भीड़ बढ़ाने के नाम पर भी सरकारी अधिकारियांे को लक्ष्य देकर लाखों रूपये इस पर भी खर्च किये जा रहे हैं. कहने को तो ये सम्मेलन गरीबों और मजदूरों के नाम पर किये जा रहे हैं, किंतु जिस तरह करोड़ों रूपये आयोजनों पर लुटाये जा रहे हैं, उससे इसके औचित्य पर सवालिया निशान लग रहे हैं?
कमलनाथ ने कहा कि यदि इतना पैसा इन वर्गों की भलाई पर खर्च किया जाता तो उनका अभी तक बेहतर उत्थान हो जाता. चुनावी वर्ष में आयोजित ये सम्मेलन सिर्फ गरीबों व मजदूरों को गुमराह करने के लिए हो रहे हैं. सम्मेलनों में इस वर्ग के लिए बड़े-बड़े वादे और घोषणाएं की जा रही हैं. यदि इन वर्गों की सरकार को इतनी चिंता होती तो पिछले 15 वर्षों में इनकी भलाई को लेकर कोई ठोस योजना बनाकर कार्य किये जाते.
नाथ ने कहा कि पांच माह बाद चुनाव सिर पर हैं. ऐसे मंे इन वर्गों के लिए की गई घोषणा कैसे पूरी होगी इसमें संदेह है? इन वर्गों को प्रभावित, गुमराह और भ्रमित करने के लिए चुनावी वर्ष में सरकार ऐसे सम्मेलन आयोजित कर उनके लिए कभी न पूरे होने वाली घोषणाऐं कर रही है. यह सब चुनावी ढकोसला है.
कमलनाथ ने कहा कि यदि शिवराज सरकार वास्तव में इन वर्गों की इतनी हितैषी है तो पिछले 15 वर्षों में इन वर्गों की भलाई के लिए कार्य क्यों नहीं किये गये. क्यों योजनाएं नहीं बनायी गयी. प्रदेश में आज भी साढ़े सैतीस लाख लोग बेघर हैं, जिनके पास मकान नहीं है. यह आंकड़ा ही शिवराज सरकार के इन वर्गों के लिए किये गये विकास कार्यों की पोल खोल रहा है. चुनावी वर्ष में गरीब, मजदूर भाइयों को वर्ष 2022 तक मकान देने का सपना इन सम्मेलनों में दिखाया जा रहा है. उनकी मौत पर सहायता देने की बात की जा रही है. लेकिन उनके भरण-पोषण व वर्तमान जीवन यापन की कोई बात नहीं की जा रही है. गरीब व मजदूर यह सच्चाई जान चुका है, वह इनके झूठे वादों में आना वाला नहीं है. वह समझ चुका है कि चुनावी वर्ष में उसे घोषणाओं का लालच देकर गुमराह किया जा रहा है.
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