राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण अपराधियों में पुलिस का कम हुआ खौफ
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| डा. गोविंद सिंह |
कांग्रेस विधायक डा. गोविंद सिंह ने कहा कि राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण अपराधियों में पुलिस का खौफ कम हो गया है. उन्होंने कहा कि राजनीतिक हस्तक्षेप से पुलिस की हो रही पोस्टिंग के चलते भी अपराध बढ़ रहे हैं. महिला अपराध और भोपाल में गैंगरेप मामले को लेकर स्थगन पर आज राज्य विधानसभा में चर्चा शुरु हुई. चर्चा में डा. गोविंद सिंंह ने कहा कि पुलिस अधिकारियों की पोस्टिंग में राजनीतिक हस्तक्षेप बहुत बढ़ गया है. अपराधों में प्रदेश देश में अव्वल हो गया है, यह स्थिति चिंताजनक है. उत्तरप्रदेश की जनसंख्या मध्यप्रदेश से ज्यादा है, मगर हमारे यहां अपराध की तुलना उत्तरप्रदेश से हो रही है. पुलिस अपराध रोकने में नाकाम रही है. प्रदेश में अपराधियों पर प्रभावी कार्यवाही न होने से अपराधियों के हौंसले बुलंद हैं. उन्होंने कहा कि जब तक राजनीतिक हस्तक्षेप से पुलिस की पोस्टिंग होती रहेगी, तब तक अपराधों पर अंकुश लगना संभव नहीं है. उन्होंने कहा कि पेट्रोलिंग की पुलिस की पूरी व्यवस्था ठप है. उन्होंने पुलिस महानिदेशक का अमले पर कंट्रोल नहीं है. इस पर पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर ने आपत्ति जताई.
गृह मंत्री ने कहा सुझाव भी दें
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| भूपेन्द्र सिंह |
गृह मंत्री भूपेन्द्र सिंह ने विपक्षी सदस्यों से अनुरोध किया कि चर्चा के दौरान सदस्य आरोप ही न लगाएं, बल्कि सुझाव भी दें. आंकड़े तो उनके पास भी है. सुझाव देंगे तो हम उन पर अमल कर व्यवस्था में सुधार लाएंगे. मंत्री ने कहा कि भोपाल गैंगरेप की घटना के बाद मेडीकल रिपोर्ट में लापरवाही पर दो डाक्टरों को निलंबित किया गया है. तीन टीआई, दो सब इंस्पेक्टर भी निलंबित किए गए हैं. एक सीएसपी को हटाया गया है. उन्होंने कहा कि पुलिस मुख्यालय के द्वारा एक लाख से ज्यादा छात्राओं का आत्मरक्षा का निशुल्क प्रशिक्षण भी दिलाया गया है. इसके अलावा टीम निर्भया को स्कूल और कालेजों के आसपास पेट्रोलिंग करने के निर्देश दिए हैं. एनसीआरबी की रिपोर्ट में बलात्कार में प्रदेश अव्वल रहने पर गृह मंत्री ने कहा कि सरकार अपराधों पर अंकुशल लगाने का हर संभव प्रयास कर रही है. उन्होंने कहा कि प्रदेश में गंभीर अपराध कम भी हुए हैं.
स्कूली छात्राओं को किया बाहर
राज्य विधानसभा में आज की कार्यवाही देखने के लिए शाजापुर से स्कूली छात्राएं आर्इं थी. ये छात्राएं कार्यवाही देख रही थी, तभी महिला अपराध को लेकर सदन में चर्चा शुरु की गई. इस पर कांग्रेस विधायक डा. गोविंद सिंह जब बोलने के लिए खड़े हुए तो उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष डा. सीतासरण शर्मा से अनुरोध किया कि सदन में स्कूली छात्राएं हैं, अगर उन्हें इस दौरान बाहर कर दिया जाए तो सही होगा. डा. सिंह के इस अनुरोध को विधानसभा अध्यक्ष ने स्वीकार किया और छात्राओं को दर्शक दीर्घा से बाहर करवाया. साथ ही उन्होंने सदस्यों से अनुरोध किया कि वे अपने शब्दों का चयन भी ठीक से करें. चर्चा के दौरान वे ऐसा कुछ न कहें, जिससे किसी की भावना आहत हो.
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