शुक्रवार, 15 दिसंबर 2017

वृद्ध माता-पिता को परेशान किया तो कटेगी तन्खा

मध्यप्रदेश सरकार अब एक नया कानून बनाने जा रही है. इस कानून के  तहत सरकारी नौकरी करने वाले कर्मचारियों ने अगर अपने माता-पिता को बेसहारा छोड़ा तो सरकार उनकी तनख्वाह काटकर बुजुर्ग माता-पिता को देगी.
मध्यप्रदेश सरकार भरणपोषण अधिनियम 2007 में प्रावधान करने जा रही है कि यदि कोई शासकीय सेवक अपने बूढे मां-बाप की उचित देखभाल का जिम्मा नहीं उठाता है तो ऐसे सरकारी अधिकारी कर्मचारी की तनखाह में कटोंती कर देखभाल हेतु पैसा अभिभावकों के खाते में जमा कर दिया जाएगा. उल्लेखनीय है कि माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण पोषण उचित तरीके से हो इसके लिए माता पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण पोषण अधिनियम 2007 मध्यप्रदेश में 23 अगस्त 2008 से लागू किया गया है. इस अधिनियम के क्रियांवयन हेतु नियम भी बनाये गये है, जिसकी अधिसूचना 2 जुलाई 2009 को लागू की गई है.
मध्यप्रदेश तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ के प्रदेश महामंत्री लक्ष्मी नारायण शर्मा ने प्रदेश सरकार के इस कदम का स्वागत किया है.  शर्मा ने कहा कि यह निश्चित ही एक अच्छा कदम है जो शासकीय सेवकों को अपने माता-पिता की उचित देखभाल के प्रति अधिक जबाब देह बनाएगा.  शर्मा ने कहा कि अगस्त 17 में असम सरकार ने ऐसा प्रावधान किया था, जिसके आधार पर मध्यप्रदेश तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ ने भी मुख्य मंत्री को ज्ञापन सौंप कर मध्यप्रदेश में ऐसा प्रावधान लागू करने की मांग की थी. 
नियमों में यह है प्रावधान
* माता पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण पोषण उचित तरीके से न करने पर 5 हजार रुपए जुर्माना या तीन माह की सजा का प्रावधान है.
* दस रुपए प्रतिमाह मासिक भरण पोषण हेतु उपलब्ध कराने का भी प्रावधान है. 
* इस अधिनियम के तहत प्रदेश में अभी तक कुल 46 प्रकरण दर्ज हुए है.

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