सोमवार, 4 दिसंबर 2017

बलात्कारी को फांसी, विधेयक पारित

सर्वसम्मति से पारित विधेयक को राष्ट्रपति को भेजेगी सरकार
मध्यप्रदेश विधानसभा में सोमवार को दंड विधि (मध्य प्रदेश संशोधन) विधेयक सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया. इसे राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा. इस विधेयक में दुष्कर्म के दोषियों को फांसी की सजा दिलाने का प्रावधान है. राज्य के कानून मंत्री रामपाल सिंह ने दंड विधि संशोधन विधेयक को सदन में पेश किया, और विधेयक पर चर्चा के बाद इसे सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया.
संशोधन विधेयक के मुताबिक, 12 साल तक की बच्ची के साथ दुष्कर्म या सामूहिक दुष्कर्म के मामले में अधिकतम फांसी की सजा दी जा सकती है. इसके अलावा विवाह करने का झांसा देकर संबंध बनाने और उसके खिलाफ शिकायत प्रमाणित होने पर तीन साल कारावास की सजा का प्रावधान नई धारा जोड़कर किया जा रहा है.  विधेयक पर चर्चा के दौरान कांग्रेस विधायक सुंदरलाल तिवारी ने कहा कि 'सरकार ने जल्दबाजी में विधेयक पेश किया है. उन्होंने कहा कि सरकार ने इसे तैयार करने के पहले कोई कमेटी क्यों नहीं बनाई और विधि विशेषज्ञों से राय क्यों नहीं ली. वहीं उन्होंने उम्र 12 साल ही रखे जाने पर सवाल खड़ा किया. हालांकि कांग्रेस ने विधेयक का समर्थन किया है.' वहीं विधेयक पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि 'बेटियां जब तक पूरी तरह सुरक्षित नहीं होगी तब तक बोझ मानी जाएगी. बेटियों की रक्षा के लिए कानून के साथ दूसरे उपाय भी जरूरी है. उन्होंने कहा कि बढ़ते महिला अपराध एक चुनौती है. चौहान ने कहा कि जिसमें मानवियता नहीं वह मानव नहीं माने जा सकते है, रेप करने वाले पिशाच होते हैं. बलात्कारियों को फांसी के फंदे पर लटका देना चाहिए.
बिल में यह है प्रावधान
इस बिल के तहत 12 साल से कम उम्र की बच्ची के साथ बलात्कार करने के दोषी को मौत की सजा देने का प्रावधान किया गया है. यह सजा गैंगरेप वाले मामले में भी लागू होगी.  इसके अलावा स्त्री को निर्वस्त्र करने के उद्देश्य से हमला करने पर एक लाख रुपए तक अर्थदंड तक लगाया जा सकता है. जमानत के मामलों को और कड़ा बनाने के लिए यह प्रावधान किया जा रहा है कि जब तक लोक अभियोजक का पक्ष नहीं सुन लिया जाएगा, जमानत नहीं होगी.

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