मध्यप्रदेश सरकार की मंशा के अनुरूप बेटी बचाओ की दिशा में जिला प्रशासन द्वारा उठाए जा रहे कदमो के माध्यम से लाड़लियों को जन्म देने में अपनी पहचान स्थापित की है. जिसमें वर्ष 2014-15 के अन्तर्गत बालिकाओं के जन्म की संख्या 13829 से बढ़ाकर चालू वित्तीय वर्ष के अन्तर्गत 14845 तक पहुंचाने की अनुकरणीय पहल की है. जिसके तहत बालको की अपेक्षा 1048 लाडलियों का अंतर आ चुका है.
भिंड जिला महिला सशक्तिकरण एवं स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से वर्ष 2014-15 में बालिकाओं के जन्म की संख्या 13829 थी. इस अवधि में 15050 बालको ने जन्म लिया था, जिसका अंतर 1221 था. इसी प्रकार वर्ष 2015-16 में 14547 बालिकाओं ने जन्म लिया था एवं 16231 बालक पैदा हुए थे, जिसका अन्तर 1684 रहा था. लाडलियों के जन्म की दिशा में वर्ष 2016-17 के दौरान 13797 लाडलियो ने जन्म लिया है. जबकि 14845 बालक जन्म है, जिसका अंतर 1048 पर पहुंचाया गया है. जिला प्रशासन के माध्यम से बेटी बचाओ की दिशा में निरंतर पहल की जा रही है. जिसमें वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार जन्म के समय शिशु लिंगानुपात 896 था. जिसके अन्तर्गत वर्ष 2016-17 में बालक 14845 एवं बालिकाएं 13797 पैदा हुई है, जिनका लिंगानुपात 929 पहुंचाने के प्रयास किए गए है. इन प्रयासों में पीसी एण्ड पीएनडीटी एक्ट की समिति के माध्यम से भी निरंतर प्रयास किए जा रहे है. साथ ही जिला प्रशासन द्वारा समाज सेवी संस्थाओं के माध्यम से भी लाडलियों के जन्म रेशो बढाने के प्रयास जारी है. प्रभारी मंत्री उमाशंकर गुप्ता द्वारा बालिकाओं का सेक्स रेशो बढ़ाने की दिशा में आयोजित बैठकों के दौरान समय समय पर पहल की गई है. साथ ही महिला एवं बाल विकास मंत्री अर्चना चिटनिस द्वारा जिला चिकित्सालय भिण्ड में पहुंचकर बालिकाओं के जन्म का अवलोकन किया था. साथ ही विभागीय अमले को बेटी बचाओ की दिशा में लाडलियों के जन्म पर निगाह रखने के निर्देश दिए थे. इसीप्रकार सामान्य प्रशासन राज्यमंत्री लालसिंह आर्य, क्षेत्रीय विधायक नरेन्द्र सिंह कुशवाह, मेहगांव क्षेत्र के विधायक चौधरी मुकेश सिंह चतुवेर्दी के द्वारा भी अपनी-अपनी विधानसभा के क्षेत्रों में बेटी बचाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे है. इन प्रयासों के अन्तर्गत आम लोगों की मानसिकता में बदलाव आया है.
भिंड के कलेक्टर डॉ. इलैया राजा टी द्वारा विगत दो वर्ष से बेटियों के जन्म की संख्या बढ़ाने की दिशा में निरंतर कदम उठाए जा रहे है. स्वास्थ्य एवं महिला बाल विकास विभाग के मैदानी अमले के माध्यम से गोहद क्षेत्र के खरौआ गांव में भी लाडलियों के जन्म में इजाफा करने के प्रयास किए जा रहे है. अब लडका और लडकी में भेद नहीं की दिशा में बदलाव दिखाई देने लगा है. इसलिए लडके और लडकियों की संख्या में ज्यादा अंतर नहीं बचा है. साथ ही विगत अप्रैल 2017 से दिसम्बर 2017 तक भिण्ड जिले में प्रदेश की अपेक्षा सबसे अधिक बेटियां जन्मी है.
भिंड जिला महिला सशक्तिकरण एवं स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से वर्ष 2014-15 में बालिकाओं के जन्म की संख्या 13829 थी. इस अवधि में 15050 बालको ने जन्म लिया था, जिसका अंतर 1221 था. इसी प्रकार वर्ष 2015-16 में 14547 बालिकाओं ने जन्म लिया था एवं 16231 बालक पैदा हुए थे, जिसका अन्तर 1684 रहा था. लाडलियों के जन्म की दिशा में वर्ष 2016-17 के दौरान 13797 लाडलियो ने जन्म लिया है. जबकि 14845 बालक जन्म है, जिसका अंतर 1048 पर पहुंचाया गया है. जिला प्रशासन के माध्यम से बेटी बचाओ की दिशा में निरंतर पहल की जा रही है. जिसमें वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार जन्म के समय शिशु लिंगानुपात 896 था. जिसके अन्तर्गत वर्ष 2016-17 में बालक 14845 एवं बालिकाएं 13797 पैदा हुई है, जिनका लिंगानुपात 929 पहुंचाने के प्रयास किए गए है. इन प्रयासों में पीसी एण्ड पीएनडीटी एक्ट की समिति के माध्यम से भी निरंतर प्रयास किए जा रहे है. साथ ही जिला प्रशासन द्वारा समाज सेवी संस्थाओं के माध्यम से भी लाडलियों के जन्म रेशो बढाने के प्रयास जारी है. प्रभारी मंत्री उमाशंकर गुप्ता द्वारा बालिकाओं का सेक्स रेशो बढ़ाने की दिशा में आयोजित बैठकों के दौरान समय समय पर पहल की गई है. साथ ही महिला एवं बाल विकास मंत्री अर्चना चिटनिस द्वारा जिला चिकित्सालय भिण्ड में पहुंचकर बालिकाओं के जन्म का अवलोकन किया था. साथ ही विभागीय अमले को बेटी बचाओ की दिशा में लाडलियों के जन्म पर निगाह रखने के निर्देश दिए थे. इसीप्रकार सामान्य प्रशासन राज्यमंत्री लालसिंह आर्य, क्षेत्रीय विधायक नरेन्द्र सिंह कुशवाह, मेहगांव क्षेत्र के विधायक चौधरी मुकेश सिंह चतुवेर्दी के द्वारा भी अपनी-अपनी विधानसभा के क्षेत्रों में बेटी बचाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे है. इन प्रयासों के अन्तर्गत आम लोगों की मानसिकता में बदलाव आया है.
भिंड के कलेक्टर डॉ. इलैया राजा टी द्वारा विगत दो वर्ष से बेटियों के जन्म की संख्या बढ़ाने की दिशा में निरंतर कदम उठाए जा रहे है. स्वास्थ्य एवं महिला बाल विकास विभाग के मैदानी अमले के माध्यम से गोहद क्षेत्र के खरौआ गांव में भी लाडलियों के जन्म में इजाफा करने के प्रयास किए जा रहे है. अब लडका और लडकी में भेद नहीं की दिशा में बदलाव दिखाई देने लगा है. इसलिए लडके और लडकियों की संख्या में ज्यादा अंतर नहीं बचा है. साथ ही विगत अप्रैल 2017 से दिसम्बर 2017 तक भिण्ड जिले में प्रदेश की अपेक्षा सबसे अधिक बेटियां जन्मी है.

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