उज्जैन में तीन दिवसीय शैव महोत्सव का शुभारंभआरएसएस प्रमुख डा. मोहन भागवत ने कहा कि हमारी संस्कृति के पदचिन्ह दुनियाभर में मिलते हैं. विष पीकर अमर होने वाला देश भारत ही हो सकता है. हमारा कर्त्तव्य बनता है कि दुनिया को राह दिखाने का काम करें.
संघ प्रमुख ने यह बात आज उज्जैन में तीन दिवसीय शैव महोत्सव के शुभारंभ अवसर पर कही. उन्होंने कहा कि शिव का पहला नाम रूद्र है, रूद्र का अर्थ है शक्ति. बिना शक्ति के शिव होने का कोई मतलब नहीं है. दुनिया की सारी दुष्ट शक्तियों को भस्म करने वाले रूद्र ही शिव हैं. हम लोगों को शक्ति की उपासना करना पड़ेगी. शारीरिक ताकत ही सबकुछ नहीं होती, उसके साथ आन्तरिक ताकत भी होना आवश्यक है. हमको भौतिक बल से साथ आध्यात्मिक बल-सम्पन्न संवेदनशील समाज बनाना पड़ेगा. दक्षिण में शिव की भभूति लगाकर बिना स्नान के भी चल सकता है. मन में कोई विकार नहीं है तो शिव का प्रतीक भस्म लगाने से तन और मन पवित्र हो जाता है. शिव भगवान अत्यन्त शातिपूर्वक बर्फीले टीले पर बैठकर आराधना पूरी करते हैं और वहीं से दुनिया को देखते हैं. शिव के समान आंतरिक एवं बाह्य पवित्रता का वरण करने वाले को ही रूद्र की शक्ति प्राप्त होती है. उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय और व्यक्तिगत चरित्र शिव के समान होना चाहिए. शांति के लिए युद्ध नहीं करना पड़ता है. इसके लिए सम्पूर्ण स्वार्थ का त्याग करना होता है. हम लोगों का दायित्व है कि हम शिव को समझें. सम्राट विक्रमादित्य ने 2100 वर्ष पूर्व शैव महोत्सव प्रारंभ किया था. आज से आयोजित शैव महोत्सव आम जन में शिवत्व की प्रेरणा जगाएगा.
विश्व को शांति मार्ग भारत ही दिखाएंगा: चौहान
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि दुनिया के विकसित देशों में जब सभ्यता का विकास ही नहीं हुआ था, तब हमारे भारत में वेदों की ऋचाएं रच ली गई थीं. विश्व को शान्ति का मार्ग भारत ही दिखाएगा. उन्होंने कहा कि भगवान शिव भारत ही नहीं सृष्टि के कण-कण में विराजित हैं. शैव महोत्सव की प्राचीन परंपरा जारी रहना चाहिए. उज्जैन से प्रारम्भ हुआ शैव महोत्सव द्वादश ज्योर्तिलिंगों तक जाएगा. थोड़ी-सी पूजा में प्रसन्न होने वाले भगवान शंकर ही हैं. उनका श्रृंगार भस्म से हो जाता है और भोग में भांग व धतूरा चलता है. चौहान ने कहा कि भगवान शंकर ऐसे व्यक्तियों को स्वीकार करते हैं, जिनको दुनिया ठुकरा देती है. समुद्र मंथन में निकले विष को धारण करने वाले देव नीलकंठ कहलाए. सबको साथ लेकर चलने वाले, सबको प्रेम करने वाले एकमात्र भगवान शंकर हैं. दुनिया को अगर बचाना है तो भारतीय संस्कृति को बचाना होगा. एकात्म यात्रा हो या शैव महोत्सव, दोनों का सन्देश यही है कि सारे भेद मिटाते हुए समाज को जोड़ा जाए.
विश्व को नई दिशा देगा शिव महोत्सव
भानपुरा पीठ के शंकराचार्य स्वामी दिव्यानंद तीर्थ ने कहा है कि भगवान शिव भारत के आदि देव हैं. शुद्धभाव से हर-हर महादेव कहने से ही शिव की उपासना पूर्ण होती है. महाकाल की नगरी में आयोजित शैव महोत्सव प्रशंसनीय एवं अनुकरणीय है. यह विश्व को एक नई दिशा प्रदान करेगा. शंकराचार्य स्वामी दिव्यानन्द तीर्थ तीन दिवसीय शैव महोत्सव का शुभारंभ कर रहे थे. स्वामी दिव्यानन्द तीर्थ ने कहा कि भारत जैसा कोई दूसरा देश नहीं है, जहाँ के लोगों को गीता का अमृत उपदेश मिला.
डाक टिकिट का विमोचन
भारतीय डाकतार विभाग द्वारा शैव महोत्सव-2018 विषय पर डाक टिकिट जारी किया गया. डाकतार विभाग द्वारा विशेष कवर, जिसमें महाकाल शिखर का चित्र है, भी जारी किया गया. द्वादश ज्योर्तिलिंग पर विशेष 12 पोस्टकार्ड भी जारी किये गये एवं सम्राट विक्रमादित्य द्वारा आयोजित प्रथम शैव उत्सव की स्मृति के रूप में प्राप्त हुई मुद्रा, जिसमें ब्राह्मी लिपि में शैव महोत्सव का विवरण अंकित है, के डाक टिकिट का भी विमोचन अतिथियों द्वारा किया गया.
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