गुरुवार, 4 जनवरी 2018

गोंड जनजाति की उपजाति है कोया जनजाति

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय द्वारा मानव एवं संस्कृति से संबंधित विभिन्न पक्षों पर शोधकार्य करने हेतु डॉ. पी शंकर राव द्वारा तेलगांना राज्य के कोया जनजातियों के मध्य जाकर शोधकार्य एवं प्रादर्श संकलन का कार्य संपादित किया गया. उनके अनुसार कोया जनजाती, गोंड जनजाती की उपजाती है. इनका बस्तर में निवासरत बाईसन हार्न माडिया जनजाती से निकट का संबंध होता है. 
कोय जनजाती मुख्यत: छत्तीसगढ़ एवं उड़ीसा एवं तेलगांना राज्य के गोदावरी और उसकी उपनदीयों के जलोढ़ मैदान के आस पास के जंगलों के मध्य रहते है. इनकी बस्तियां प्राय: पानी की आपूर्ति वाले स्त्रोतों जैसे तालाबों, नदीयों, या कुआं आदि के आस-पास होते है. इन बस्तियों में घरों की संख्या 3 से 60 तक होती है लेकिन अक्सर लगभग 200 लोगों की आबादी वाले बस्ती में घरों की संख्या तीस और चालीस के बीच होती हैं. 
आमतौर पर नदी के मैदान पर स्थित गांव बड़े और पहाड़ियों और जंगल में गांव छोटे होते हैं. घरों का निर्माण लकड़ी, फूस, मिट्टी, और बांस के ड़डो से किया जाता है. घर में दो कमरे एवं बरांमदा होता है जिसमें से एक कमरे रसोई होती है और दूसरे कमरे को रहने के लिए उपयोग किया जाता है. इनके घरों में जल भंडारण के लिए मिट्टी के बर्तन, पीतल के बर्तन, बांस से निर्मित बास्केट, झाड़ू, धनुष और तीर, एक ड्रम, एक भाला, कीमती सामानों के लिए एक छोटे धातु के बक्से, मसाला पीसने वाला पत्थर, कुदाल, कुल्हाड़ी, अनाज के बैग, धूपदान और तंबाकू एवं भोजन बनाने के समान का संग्रह प्रमुखता से किया जाता है.

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