मानव अधिकार आयोग ने पुलिस ने पूछा है कि थानों में सीसीटीव कैमरे किस उद्देश्य से लगाए गए हैं. आयोग ने पूछा है कि क्या सीसीटीवी फूटेज थानों की गोपनीयता को भंग कर सकता है?
आयोग ने राजधानी के डीआईजी से एक मामले में अदालत द्वारा कहे जाने पर भी सीसीटीवी फूटेज न दिए जाने के मामले में यह जानकारी चाही है. उल्लेखनीय है कि राजधानी के थाना निशातपुरा द्वारा डकैती की योजना बनाते हुए आरोपी युनुस उर्फ चीना व नदीम को गिरफ्तार किया था. आरोपियों की तरफ से अदालत में पुलिस की इस कार्यवाही को बर्बरतापूर्ण रवैया बताये जाने पर अदालत ने पुलिस से सीसीटीव फुटेज पेश करने के लिए कहा, लेकिन पुलिस ने थाने में मुखबिरों के आने जाने के कारण पुलिस की गोपनीयता भंग होने का हवाला देकर सीसीटीवी फुटेज अदालत में पेश नहीं किए. अदालत ने पुलिस के इस जवाब पर आरोपियों को जमानत पर रिहा कर दिया. आयोग ने इस मामले में संज्ञान लेकर पुलिस उप महानिरीक्षक भोपाल से प्रतिवेदन चाहा है. आयोग ने डीआईजी से पूछा है कि थानों पर सीसीटीवी कैमरे किस उद्देश्य से लगाए गए हैं. यदि सीसीटीवी कैमरे के फुटेज का उपयोग थाने की कोई गोपनीयता भंग कर सकता है. तो उन्हें थानों पर लगाए जाने का क्या औचित्य है. कोई अन्य अनजान व्यक्ति सीसीटीवी फुटेज में दिखने वाले व्यक्तियों में से मुखबिर को कैसे पहचानेगा. क्या थाने पर आने वाले मुखबिर की कोई विशिष्ट पहचान होती है, जिससे सीसीटीवी फुटेज देखते ही उसे पहचाना जा सके.
स्ट्रीट लाईट न होने के कारण हो रही दुर्घटनाएं
मानव अधिकार आयोग ने इन्द्रपुरी से अयोध्या बायपास को जोड़ने वाली 80 फीट रोड के निर्माण के आठ साल बीत जाने के बाद भी स्ट्रीट लाईट न लग पाने के कारण रहवासियों को हो रही असुविधा तथा अंधेरे में हो रही वाहन दुर्घटना के मामले में संज्ञान लिया है. आयोग ने इस सिलसिले में आयुक्त, नगर निगम, भोपाल से प्रतिवेदन मांगा है.
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