जनजातीय
कार्य एवं अनुसूचित जाति
कल्याण राज्य मंत्री लाल सिंह
आर्य ने कहा है कि मध्यप्रदेश
शासन का लक्ष्य अनुसूचित जाति,
जनजाति
वर्ग के लोगों की तकदीर संवारना
है.
शासकीय
मदद का लाभ वही व्यक्ति उठा
सकते हैं जिनके इरादे दृढ़ हों
और लक्ष्य स्पष्ट हो.
आर्य
ने यह बात जनजातीय कार्य विभाग
एवं अनुसूचित जाति विकास
द्वारा प्रतिभाशाली छात्र-छात्राओं
के लिए आयोजित 5
दिवसीय
नेतृत्व विकास शिविर का शुभारंभ
करते हुए कही. कार्यक्रम
का आयोजन शासकीय गुरूकुलम
आवासीय विद्यालय बावड़िया कला
भोपाल में किया गया.
शिविर
में भाग लेने आए बच्चों से
चर्चा के दौरान राज्य मंत्री
आर्य ने कहा कि प्रतिभाएं
महलों में ही नहीं झोपड़ी में
भी पैदा हो सकती हैं.
यह
बात शिक्षा और खेलकूद के क्षेत्र
में प्रादेशिक ही नहीं,
अंतर्राष्ट्रीय
स्तर पर भी प्रदर्शन कर इस
वर्ग के विद्यार्थियों ने
सिद्ध कर दी है.
उन्होंने
बच्चों को सलाह दी कि जीवन में
बड़े से बड़ा लक्ष्य निर्धारित
करें,
उसे
प्राप्त करने के लिए अपनी
सम्पूर्ण सामर्थ,
क्षमता,
एकाग्रता
के साथ प्रयास करें.
उन्होंने
कहा कि सफलता उन्हें ही मिलती
है,
जो
आत्म विश्वास को कम नहीं होने
देते.
उन्होंने
विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय
उपलब्धि हासिल करने वाले
प्रतिभागियों से वन टू वन
चर्चा भी की.
प्रमुख
सचिव एन.एन.
मिश्रा
ने कहा कि विकास शिविर का मुख्य
उद्देश्य इन वर्गों के बच्चों
में नेतृत्व क्षमता विकसित
करना है.
इसमें
उन्हें विभिन्न क्षेत्रों
के सफल व्यक्तियों से मिलवाया
जाता है ताकि वह कुछ नया सीख
सकें.
साथ
ही बाहर के वातावरण से परिचित
हो सकें.
उन्होंने
प्रतिभागियों से अपने केरियर
के प्रति गंभीर रहने और लक्ष्य
प्राप्त करने के लिए पूरी ताकत
से प्रयास करने की सलाह दी.
आयुक्त
दीपाली रस्तोगी ने कहा कि
अनुसूचित जाति और अनुसूचित
जनजाति वर्ग के शैक्षणिक और
आर्थिक उत्थान के लिए राज्य
सरकार कृत संकल्पित है.
प्रदेश
में 36
प्रतिशत
आबादी इन वर्गों की है.
इन
वर्गों के कल्याण के लिए 7.50
करोड़
रुपये के विभिन्न विकास कार्य
और योजनाएँ संचालित की जा रही
हैं.

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