मध्यप्रदेश की महिला बाल विकास मंत्री अर्चना चिटनिस महाराष्ट्र के जलगांव जिले के ग्राम बलवाड़ी के तीर्थक्षेत्र श्रृंगऋषिधाम सिंगत में आयोजित हरिनाम संकीर्तन सतसंग में सम्मिलित हुई. इस अवसर पर चिटनिस ने संत श्रृंगऋषि के दर्शन कर गौ-माता का पूजन किया. इस मौके पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री चिटनिस ने कहा कि भारत उस महान ऋषि की तपोभूमि है जिनकी तस्पया से धरती पर रामजी का जन्म हुआ. उन्होंने कहा कि यह देश कमाने वालों को याद नहीं करता है, यह देश लोककल्याण के लिए लौटाने वालों को याद करता है. उन्होंने कहा कि प्रकृति ईश्वर का साक्षात स्वरूप है. अगर आप पेड़ की पूजा नहीं करेंगे तो आप पर परमात्मा कभी कृपा-दृष्टि नहीं करेंगा. यदि पर्यावरण सुरक्षित नहीं होगा तब, यह धरती भी सुरक्षित नहीं रहेगी. जन्मभूमि की सेवा करें, प्रकृति से प्रेम करें, प्रकृति आपके जीवन को संरक्षित करेंगी. हर धर्म में हर संत और प्रत्येक महात्मा में वृक्ष लगाकर इसे पालने की बात कही है. प्रकृति को ईश्वर का स्वरूप माना है, निस्वार्थ भाव से किया गया काम ही मानवता और धर्म है. प्रकृति से प्यार करने वाला ही इंसानियत का पुजारी हो सकता है. चिटनिस ने कहा कि धरती हमें हमारे पूर्वजो से विरासत में मिली है, इसे हम आने वाली पीढ़ी को हरा-भरा और वृक्षों से आच्छादित कर सौंपेंगे। यही हमारा लक्ष्य और संकल्प भी हो. उन्होंने कहा कि सत्संग और संत समाज को सदमार्ग पर चलना सिखाते है. हम अधिकतम समय अर्थात जीवनभर जिसके बारे में सोचेंगे, जिसे स्मरण करेंगे अंतत: हमारी ज्योति उसमें ही विलीन होती है, इसलिए सबको अपने-अपने प्रभु का सदैव स्मरण करते हुए सदमार्ग पर रहना चाहिए. चिटनिस ने कहा कि हम पशुपालन नहीं करके धरती मां के प्राण निकाल रहे है. गाय में गौ-माता का वास होता है. सबमें ईश्वर देखने वाला देश हमारा भारत है. इसी प्रकार मंत्री अर्चना चिटनिस महाराष्ट्र के ग्राम दसनूर के उमेश्वर महादेव मंदिर में भगवान शिवशंकर के दर्शन कर आयोजित श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ सप्ताह कथा में शामिल होकर अपने विचार रखें.वहीं ग्राम चापोरा में भी आयोजित श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ सप्ताह में कथा का श्रवण किया.
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