बुधवार, 3 जनवरी 2018

इलेक्ट्रोल बांड योजना से चुनाव में आएगी पारदर्शिता

नंदकुमार सिंह 
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष, सांसद नंदकुमार सिंह चौहान ने कहा कि चुनाव में कालेधन के इस्तेमाल का मुद्दा लंबे समय से राजनैतिक दलों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है. मंचीय दावों के बावजूद किसी सरकार ने चुनावों में शुचिता और पारदर्शिता लाने का साहस नहीं दिखाया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए सरकार ने चुनाव में कालेधन पर रोक लगाकर शुचिता लाने की दिशा में जो कदम उठाया है, उसमें सभी राजनैतिक दलों की सहमति अपेक्षित होगी. ऐसा करने से भारत में चुनाव भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने की प्रतिबद्धता पूरी करने में राजनैतिक दलों की सहमति मील का पत्थर बनेगी. उन्होंने कहा कि बजट सत्र के पूर्व शीलकालीन सत्र में वित्त मंत्री अरूण जेटली ने राजनैतिक दलों से अपेक्षा की है कि वे चुनावी फंडिंग में भ्रष्टाचार मिटाने के लिए प्रस्तावित इलेक्ट्रोल बांड योजना का स्वागत करेंगे और इस प्रस्ताव पर समय रहते सहमति का आगाज करेंगे. राजनैतिक दलों को चुनाव में चंदा देने के उत्सुक लोग, संस्थाएं इन बांडों का उपयोग कर सकेंगी.  चौहान ने कहा कि इलेक्ट्रोल बॉड के जरिए चंदा देने की प्रक्रिया में बैंक चंदा देने वाले और राजनैतिक दल चंदा लेने वाले के बीच मध्यस्थ होगा. इलेक्ट्रोल बांड से चंदा उसी दल को मिल सकेगा जिसने पिछले चुनाव में न्यूनतम 1 प्रतिशत वोट हासिल किये हैं. चंदा लेने वाले दल को एक बैंक की पहचान बताना होगी, जहॉ चंदा जमा होगा और उसका 15 दिन में नकदीकरण कराना होगा. माह में दस दिन में बांड उपलब्ध किये जायेंगे. इसके लिए चुनाव वर्ष में तीस दिन चुनावी बांड खरीदने के लिए काउन्टर काम करेगा. प्रारंभिक तौर पर स्टेट बैंक आॅफ इंडिया की शाखाओं में ही ये बांड उपलब्ध होंगे. इलेक्ट्रोल बांड योजना का संकेत एनडीए सरकार ने पहले ही 2017-18 का बजट पेश करते हुए दे दिया था. शीत कालीन बजट सत्र में केंद्र सरकार ने अपना मंतव्य स्पष्ट कर दिया है और आम सहमति पर सबकी निगाहे लगी हुई हैं. इलेक्ट्रोल बांड की एक विशेषता यह होगी कि दानदाता की पहचान गुप्त रहेगी. 

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