रविवार, 3 जून 2018

किसान आंदोलन से दूध, सब्जियों की आपूर्ति हुई प्रभावित

 कई स्थानों पर पुलिस की मौजूदगी में बिगी सब्जियां
देश के अन्य राज्यों की तरह मध्य प्रदेश में गांव बंद आंदोलन जारी है. आंदोलन के तीसरे दिन गांव से सब्जियों व दूध आदि की आपूर्ति प्रभावित है जबकि सब्जियों के दाम में भी इजाफा हो रहा है. इसके अलावा कई स्थानों पर सब्जियों की बिक्री पुलिस की मौजूदगी में हो रही है.
किसान आंदोलन तीसरे दिन भी शांतिपूर्वक ढंग से जारी है. बीते दो दिनों की तरह रविवार को भी किसी तरह की झड़प की खबर नहीं है. किसान खुद ही गांव से ज्यादा बाहर नहीं निकल रहे हैं.  आम किसान यूनियन के प्रमुख केदार सिरोही ने   बताया कि किसान इस आंदोलन में भरपूर साथ दे रहे हैं, यही कारण है कि शहरों तक गांव का सामान नहीं पहुंच रहा. सरकार आंदोलन को असफल बनाने पर तुली हुई है लेकिन उनकी कोशिशें कामयाब नहीं हो पा रही. प्रदेश के राजगढ़ में खुफिया एजेंसियों की तीसरे दिन आंदोलन के जोर पकड़ने की सूचना के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने जिले भर में सुरक्षा इंतजाम तगड़े कर दिए गए. हर जगह पुलिस व अन्य सुरक्षा बल तैनात हैं और प्रशासनिक तंत्र किसानों को समझाइश देने में जुटा है. ब्यावरा में किसानों ने एवं खिलचीपुर में कांग्रेसियों ने रैली निकालकर प्रदर्शन किया.महासंघ ने कहा कि राजगढ़ख सिंगरौली एवं अन्य जिलों में गिरफ्तारियां कर थाने में किसानों को बैठाया गया. 
वहीं राजधानी भोपाल में मंडियों में किसान आम दिनों की तरह ही सब्जी लेकर मंडी में पहुंचे. व्यापारियों का कहना है कि किसान सामान्य रूप से तो आ रहे हैं, लेकिन जिले के बाहर के किसान और कुछ स्थानीय किसान नहीं पहुंचने से 30 से 40 फीसदी का असर पड़ा है. हालांकि उनका कहना है कि आने वाले दिनों में जरूर सब्जियों के दाम बढ़ने की आशंका है. 
मंदसौर में कम दिखा बंद का असर
 किसान आंदोलन के लिए संवेदनशील माने जा रहे मंदसौर में गांव बंद का असर बेहद ही कम दिखाई दे रहा है. पहले दिन से ही किसान आंदोलन की हड़ताल का जिलेभर में आंशिक असर है. कई जगह सब्जी मंडी में सब्जियों की नीलामी चालू है आंदोलन के पहले दिन ही फलों, सब्जियों और दूध की सप्लाई बंद करने की खबरों के बीच चहल-पहल शुरू हो गई थी. कई जिलों में पुलिस की सुरक्षा के बीच दूध की सप्लाई शहर में की जा रही है, जो आज तीसरे दिन भी जारी रहा. प्लांट से निकलने वाले सभी वाहनों को पुलिस वाहनों के साथ ही शहर में भेजा जा रहा है.
उल्लेखनीय है कि बीते साल 6 जून को आंदोलन कर रहे किसानों पर पुलिस ने मंदसौर में गोलियां बरसाई थीं, जिसमें छह किसानों की जान गई थी और बाद में एक की पुलिस की पिटाई से मौत हुई थी. इस घटना के एक साल पूरा होने पर छह जून को मंदसौर में श्रद्घांजलि सभा का आयोजन किया जा रहा है। इस मौके पर कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी भी पहुंच रहे हैं.
दमनकारी नीतियां बंद नहीं हुई तो तैयार है रणनीति
राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के सरंक्षक शिवकुमार शर्मा कक्काजी ने कहा कि सरकारें किसानों की गिरफ्तारी कर उन्हें डराने का काम कर रही हैं. किसानों के आंदोलन के दौरान पुलिस के आतंक का प्रदर्शन किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि केन्द्रीय मंत्री राधामोहन सिंह ने जो बयान दिया, उससे किसान समाज आहत है. शर्मा ने कहा कि वे केन्द्रीय मंत्री के बयानपर कहा कि प्रसिद्धि की चिंता सबसे आपकों और आप जैसे नेताओं ाके होती है. आप अपनी प्रसिद्धि के लिए क्या ऐसा कोई कृत्य कर सकते हैं? किसान की मौत पर भाजपा के नेता लगातार उपहास कर रहे हैं. यह निर्लज्जता है. शर्मा ने कहा कि हम सरकार को चेतावनी देते हैं कि किसान के धैर्य की परीक्षा न लें. ना तो किसान कमजोर है, न ही कायर. उसे हमारे संगठन के अनुशासन ने बांध रखा है. सरकार  धीरे-धीरे एक विशेष रणनीति के तहत किसानों के दमन करने की दिशा में आगे बढ़ रही है. सरकार के इस प्रयास पर हमारी पैनी निगाह है.शर्मा ने कहा कि केन्द्रीय मंत्री के शर्मनाम बयान एवं मुख्यमंत्री की दमनकारी नीतियों के विरोध में पूरे मध्यप्रदेश में लगातार पुतला दहन किया जाएगा. उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने अपनी दमनकारी नीतियां बंद नहीं की तो महासंघ ने इसके लिए रणनीति बना ली है.

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