कमलनाथ की राहुल गांधी को लिखी गई चिट्ठी सार्वजनिक होने के बाद कांग्रेस के अंदरखाने में हंगामा चल रहा है. सूत्रों के अनुसार कांग्रेस की फौरी जांच में पता चला है कि चिट्ठी खुद अरुण यादव ने लीक की थी. हालांकि चिट्ठी सार्वजनिक करने के पीछे अरुण यादव की क्या मंशा थी, इस पर कयास लगाए जा रहे हैं. मामले को लेकर जब अरुण यादव का नाम आया तो यादव ने सफाई दी और कहा कि कमलनाथ तो मेरे अभिभावक है, उन्होंने चिट्ठी को लेकर भाजपा पर भी हमला बोला.
बताया जा रहा है कि अरुण यादव ने नाराजगी के चलते इस चिट्ठी को सार्वजनिक किया हैं. अरुण यादव प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाए जाने के बाद से नाराज चल रहे हैं. अब इस मामले में शिकायत कमलनाथ के पास पहुंच चुकी है और जल्दी ही एक पदाधिकारी और एक प्रवक्ता पर कार्रवाई होना तय माना जा रहा है.
बता दें कि चिट्ठी में कमलनाथ ने स्वर्गीय सुभाष यादव की बरसी के मौके पर राहुल गांधी को न्यौता भेजा था और ये कहा था कि इस क्षेत्र में ओबीसी 61 सीटों पर असर डाल सकता है इसलिए चुनाव के मद्देनजर लाभ लिया जा सकता है.
वहीं कमलनाथ की चिट्टी पर भाजपा ने आरोप लगाया कि कमलनाथ द्वारा राहुल गांधी को लिखे पत्र से उजागर होता है कि कमलनाथ स्वर्गीय सुभाष यादव को केवल वोट बैंक का कारण मानते हैं.
वहीं प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अरुण यादव ने उनके पूज्य दिवंगत पिता व प्रदेश के पूर्व उप मुख्यमंत्री सुभाष यादव की प्रतिवर्ष 26 जून को मनाई जाने वाली पुण्यतिथि पर कांग्रेस परिवार के मुखिया श्री कमलनाथ द्वारा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी को दिए गए आमंत्रण पर तिलमिलाई भाजपा पर आज बड़ा हमला बोला़.
यादव ने कहा कि दरअसल, कांग्रेस की एकजुटता, पार्टीजनों की मेहनत और जनता की ओर से मिल रहे बदलाव के स्पष्ट संकेतों के बाद हताश-कुंठाग्रस्त भाजपा मानसिक अवसाद के दौर से गुजर रही है. ‘‘परिश्रम की अपेक्षा परिक्रमा से पद हथियाने वाले कतिपय लोगों को यह सकारात्मक परिस्थितियां रास नहीं आ रही हैं.’’
यादव ने कहा कि दशकों तक मेरे पूज्य पिता और कमलनाथ के परस्पर सगे भाइयों वाले पारिवारिक रिश्ते रहे हैं. लिहाजा, उनकी अनुपस्थिति में आज वे मेरी पार्टी के मुखिया के साथ मेरे अभिभावक भी हैं. राहुल को संबोधित पत्र में उनके द्वारा मेरे पिता के सम्मान में प्रयुक्त भाषा उनकी दिली भावनाओं की अभिव्यक्ति है, जिसे भाजपा पचा नहीं पा रही है. यादव ने उनकी कथित पैरोकारी कर रही भाजपा पर प्रहार करते हुए पूछा कि कल तक जो अरुण यादव उसकी आँखों की किरकिरी बना हुआ था,आज अचानक आँखों का तारा कैसे बन गया है?
यादव ने आज उन सहित उनके परिवार के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि मेरे पूज्य पिता और परिवार ने अपनी समूची राजनैतिक-पारिवारिक ताकत साम्प्रदायिक, अधिनायकवादी और तानाशाही प्रवर्तियों से लड़ने में झौंकी है, उस विरासत को हम विस्मृत कैसे कर सकते हैं. पार्टी के मुखिया कमलनाथ के कुशल नेतृत्व में उन्हें उखाड़ फेंकने के लिए हम सब कृतसंकल्पित हैं.
बताया जा रहा है कि अरुण यादव ने नाराजगी के चलते इस चिट्ठी को सार्वजनिक किया हैं. अरुण यादव प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाए जाने के बाद से नाराज चल रहे हैं. अब इस मामले में शिकायत कमलनाथ के पास पहुंच चुकी है और जल्दी ही एक पदाधिकारी और एक प्रवक्ता पर कार्रवाई होना तय माना जा रहा है.
बता दें कि चिट्ठी में कमलनाथ ने स्वर्गीय सुभाष यादव की बरसी के मौके पर राहुल गांधी को न्यौता भेजा था और ये कहा था कि इस क्षेत्र में ओबीसी 61 सीटों पर असर डाल सकता है इसलिए चुनाव के मद्देनजर लाभ लिया जा सकता है.
वहीं कमलनाथ की चिट्टी पर भाजपा ने आरोप लगाया कि कमलनाथ द्वारा राहुल गांधी को लिखे पत्र से उजागर होता है कि कमलनाथ स्वर्गीय सुभाष यादव को केवल वोट बैंक का कारण मानते हैं.
वहीं प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अरुण यादव ने उनके पूज्य दिवंगत पिता व प्रदेश के पूर्व उप मुख्यमंत्री सुभाष यादव की प्रतिवर्ष 26 जून को मनाई जाने वाली पुण्यतिथि पर कांग्रेस परिवार के मुखिया श्री कमलनाथ द्वारा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी को दिए गए आमंत्रण पर तिलमिलाई भाजपा पर आज बड़ा हमला बोला़.
यादव ने कहा कि दरअसल, कांग्रेस की एकजुटता, पार्टीजनों की मेहनत और जनता की ओर से मिल रहे बदलाव के स्पष्ट संकेतों के बाद हताश-कुंठाग्रस्त भाजपा मानसिक अवसाद के दौर से गुजर रही है. ‘‘परिश्रम की अपेक्षा परिक्रमा से पद हथियाने वाले कतिपय लोगों को यह सकारात्मक परिस्थितियां रास नहीं आ रही हैं.’’
यादव ने कहा कि दशकों तक मेरे पूज्य पिता और कमलनाथ के परस्पर सगे भाइयों वाले पारिवारिक रिश्ते रहे हैं. लिहाजा, उनकी अनुपस्थिति में आज वे मेरी पार्टी के मुखिया के साथ मेरे अभिभावक भी हैं. राहुल को संबोधित पत्र में उनके द्वारा मेरे पिता के सम्मान में प्रयुक्त भाषा उनकी दिली भावनाओं की अभिव्यक्ति है, जिसे भाजपा पचा नहीं पा रही है. यादव ने उनकी कथित पैरोकारी कर रही भाजपा पर प्रहार करते हुए पूछा कि कल तक जो अरुण यादव उसकी आँखों की किरकिरी बना हुआ था,आज अचानक आँखों का तारा कैसे बन गया है?
यादव ने आज उन सहित उनके परिवार के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि मेरे पूज्य पिता और परिवार ने अपनी समूची राजनैतिक-पारिवारिक ताकत साम्प्रदायिक, अधिनायकवादी और तानाशाही प्रवर्तियों से लड़ने में झौंकी है, उस विरासत को हम विस्मृत कैसे कर सकते हैं. पार्टी के मुखिया कमलनाथ के कुशल नेतृत्व में उन्हें उखाड़ फेंकने के लिए हम सब कृतसंकल्पित हैं.
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