राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने आजअरविन्दो इन्स्टीट्यूट आॅफ मेडिकल साइंस परिसर में सैम्स-जियो विश्वविद्यालय का भूमिपूजन किया. इस विश्वविद्यालय में चिकित्सा, विज्ञान के अलावा कानून और वाणिज्य की भी शिक्षा दी जायेगी.
इस अवसर पर राज्यपाल पटेल ने कहा कि हमारे देश में धन और शिक्षा का तेजी से विकास हो रहा है, मगर संस्कारों में कमी आ रही है. हमें संस्कारवान नई पीढ़ी तैयार करना है. इस काम में शैक्षणिक संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका है. पराक्रम, पुरुषार्थ, शिक्षा और धन के साथ संस्कार जरूरी है. राज्यपाल पटेल ने कहा कि हमारा उद्देश्य हर व्यक्ति को शिक्षा प्रदान करना है. मनुष्य की मूलभूत आवश्यकता रोटी, कपड़ा, मकान, शिक्षा और स्वास्थ्य है. प्रदेश में हर साल नये कॉलेज और विश्वविद्यालय खुल रहे हैं. किसी भी विश्वविद्यालय में रैगिंग नहीं होना चाहिये, बल्कि ऐसी परम्परा शुरू करने के निर्देश दिये गये हैं कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान में पुराने विद्यार्थी नये विद्यार्थियों का आत्मीय स्वागत करें. रैगिंग भी कुसंस्कार का परिणाम है.
राज्यपाल पटेल ने कहा कि आजकल शिक्षा के मायने बदल गये हैं. "सा विद्या या विमुक्तये" अर्थात असली शिक्षा वही है, जो हमें मुक्ति प्रदान करें. आजकल व्यावसायिक शिक्षा पर विशेष जोर दिया जा रहा है. वही शैक्षणिक संस्थान सबसे अच्छा माना जाता है, जहाँ सबसे ज्यादा प्लेसमेंट हो. विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक ज्ञान और औद्योगिक कम्पनियों में सघन प्रशिक्षण जरूरी है. शासन ऐसे प्रयास करें कि गाँव की महिलाओं को भी उच्च शिक्षा मिल सके. शैक्षणिक संस्थान, समाजसेवी और व्यवसायी लोग एक-एक गाँव गोद लेकर आदर्श प्रस्तुत करें. भारत माता ग्रामवासिनी है. ग्राम हमारी सभ्यता और संस्कृति के केन्द्र रहे हैं. गाँवों के विकास से ही देश का विकास होगा. शासन की मंशा भी है कि सबका साथ-सबका विकास.
उन्होंने कहा कि राज्य और केन्द्र सरकार महिला सशक्तिकरण पर जोर दे रही है. केन्द्र और राज्य शासन की मंशा है कि महिलाएँ शिक्षित हों, स्वयं का रोजगार या नौकरी के क्षेत्र में आगे आयें. आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनें. केन्द्र और राज्य सरकार ने महिलाओं के लिए प्रधानमंत्री उज्जवला योजना, प्रधानमंत्री सौभाग्य योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, प्रधानमंत्री मातृवंदना योजना शुरू की है, जिससे महिलाओं के जीवन में क्रान्तिकारी बदलाव सामने आ रहा है. इन योजनाओं के दूरगामी परिणाम सामने आयेंगे. उन्होंने आह्वान किया कि विद्यार्थी वर्ग अपनी ऊर्जा का रचनात्मक उपयोग करें और समाज में शांति और सद्भाव में योगदान करें.

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