बुधवार, 20 जून 2018

हिन्दू से आतंकवाद को जोड़ने के बाद बचने का रास्ता तलाश रहे है दिग्विजय सिंह



भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं पूर्व प्रदेश अध्यक्ष  विक्रम वर्मा ने दिग्विजय सिंह के हिन्दू और संघ पर दिए गए बयान को उनकी हताशा से भरा हुआ निराधार कृत्य बताया है. 
वर्मा ने कहा कि यद्यपि श्री दिग्विजय सिंह पर टिप्पणी करना अब अच्छा नहीं लगता है, क्योंकि वे अपनी विश्वसनीयता कांग्रेस में ही खो चुके है, और बाहर तो उन्हें कोई सुनने को तैयार ही नहीं है. आए दिन बेतुके बयान देने के आदी दिग्विजय सिंह ने हिन्दू शब्द के बारे में जो बोला है, वह दर्शाता है कि वे हिन्दू आतंकवाद का लगातार उल्लेख करने के बाद भूतकाल में मिले प्रतिसाद से घबराकर बीच का रास्ता ढंूढ रहे है. हमारी वैदिक परंपरा में सुसंस्कृत होने वाले जिस समाज को चिन्हित किया गया है, उसे हम व्यापक दृष्टिकोण में हिन्दू ही कहते हैं. भारतीय जीवन मूल्यों में श्रद्धा और  आदर रखने वाले हिन्दू समाज के प्रति  दिग्विजय सिंह पूर्व में भी जो बोलते रहे है, और उसका परिणाम भी भुगतते रहे हैं, इसलिए अब वे इस नए कुतर्क पर उतर आए है कि हिन्दू आतंकवाद अथवा भगवा आतंकवाद से मेरा आशय संघी आतंकवाद अथवा आरएसएस का आतंकवाद है. 
 वर्मा ने कहा कि  दिग्विजय सिंह के जीवन में उम्र के इस पड़ाव पर और कम से कम नर्मदा जी की परिक्रमा करने के बाद तो यह नैतिकता आ जानी चाहिए कि वे यह स्वीकार करें कि इतिहास में जितने भी जांच आयोग बने, किसी ने भी संघ को आतंकवाद से नहीं जोड़ा. ये जितने भी जांच आयोग थे, उन सब की जांच कांग्रेस सरकारों के कार्यकाल में ही हुई है. सच तो यह है कि देश को आज यह जानने की आवश्यकता है कि जहां-जहां अधिकांश दंगे हुए, वहां कांग्रेस की ही सरकारें थीं. दरअसल संघ की बढ़ती स्वीकार्यता से कांग्रेस के होश बिगड़े हुए हैं. चंूकि संघ के मंचों पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आने लगे है, उससे कांग्रेस कुंठाग्रस्त है, भयभीत है. यद्यपि यह कोई नहीं बात नहीं है, इससे पूर्व भी भारत पर आयी विपत्तियों के समय कांग्रेस के बड़े-बड़े नेताओं ने संघ की प्रासंगिकता और देशभक्ति को समझते हुए न सिर्फ महत्वपूर्ण कार्यो में लगाया, बल्कि सम्मान भी दिया. दिग्विजय सिंह जैसे संकीर्ण और विघटनकारी मानसिकता के लोग भारतीय समाज में विद्वेष और बंटवारे के बीज बोना चाहते हैं, लेकिन उनकी यह इच्छा कभी पूरी नहीं होगी. 

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