गुरुवार, 21 जून 2018

घरेलु विवाद के जरिए राजघरानों पर निशाना

सिंधिया परिवार से लेकर अजय सिंह तक हुए शिकार
मध्यप्रदेश में राजघरानों के घरेलू विवाद के चलते कमजोर होने का सिलसिला अब भी जारी है. इसके चलते कांग्रेस के दिग्गज नेताओं को भाजपा ने अपने घरों में उलझाने का प्रयास किया है. नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह को गृह कलह में उलझाकर उनके द्वारा विधानसभा में लाए जाने वाले अविश्वास प्रस्ताव को एक तरह से पहले ही गिरा दिया है और जनता में यह संदेश चला गया कि पहले आप घर में विश्वास तो जीतिए. वहीं  उन्हें, उनके विधानसभा क्षेत्र चुरहट में कमजोर करने का भी प्रयास किया जा रहा है. खुद अजय सिंह यह आरोप लगा रहे हैं कि यह भाजपा का षडयंत्र है.
जनसंघ के बाद अस्तित्व में आई भाजपा, जनसंघ की शैली में ही कार्य करती नजर आ रही है. भाजपा ने कांग्रेस के दिग्गज नेताओं विशेषकर राजघरानों को कमजोर करने में सफल रही है. पारिवारिक तोड़ का सफर ग्वालियर राजघराने से शुरु हुआ, यहां पर राजमाता सिंधिया को पहले जनसंघ से जोड़ा और फिर बाद में उनके पुत्र माधवराज सिंधिया से उनकी दूरी हुई. यह दूरी आज भी बरकरार नजर आ रही है. माधवराव सिंधिया कांग्रेस के दिग्गज नेता के रुप में स्थापित रहे, तो उन्हें कमजोर करने का भाजपा ने हरसंभव प्रयास किया और राजमाता को उनके सामने ला खड़ा करने का काम किया. ग्वालियर से जब अटल बिहारी वाजपेयी के खिलाफ माधवराव सिंधिया मैदान में थे तो राजमाता सिंधिया को पूरी ताकत के साथ माधवराव सिंधिया के खिलाफ भाजपा ने प्रचार मैदान में उतारा. आज भी भाजपा का बड़ा वर्ग सिंधिया घराने के खिलाफ नजर आता है. विशेषकर भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रभात झा और उच्च शिक्षा मंत्री जयभान सिंह पवैया. दोनों नेता हमेशा ही महल के खिलाफ बयानबाजी करते रहे हैं. सिंधिया घराने के बाद भाजपा ने दिग्विजय सिंह के परिवार में सेंधमारी की. दिग्विजय सिंह के अनुज लक्ष्मणसिंह को भाजपा में लाकर चुनाव लड़ाया. हालांकि बाद में लक्ष्मण सिंह की वापसी हुई. मगर  लक्ष्मण सिंह के भाजपा में जाने से दिग्विजय सिंह कमजोर हुए. इसी तरह रीवा राजघराने में भाजपा ने मार्तण्ड सिंह के परिवार में सेंधमारी करके उसे कमजोर करने का प्रयास किया. मार्तण्ड सिंह के पुत्र पुष्पराज सिंह कांग्रेस के टिकट पर विधायक बने. इसके बाद उन्हें कमजोर करने का पूरा प्रयास हुआ. पुष्पराज सिंह के पुत्र दिव्यराजसिंह सिरमोर विधानसभा सीट से भाजपा के विधायक हैं. कांग्रेस शासनकाल में मंत्री रहे पुष्पराज सिंंह की कांग्रेस में स्थिति कमजोर होती रही और उनकी सक्रियता भी कम ही दिखाई दी. 
विंध्य क्षेत्र में ही कांग्रेस को कमजोर करने के प्रयास के रुप में वर्तमान में नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह और उनकी मां के संबंधों के बीच की दरार को अदालत तक पहुंचाना है. यह माना जा रहा है कि अजय सिंह की बहन वीणा सिंह भाजपा की ओर से टिकट पाकर चुरहट से विधानसभा के चुनाव में उम्मीदवार हो सकती है. भाजपा यह दाव खेल सकती है. भाजपा के लिए यह दाव खेलना भी जरुरी नजर आ रहा है. पांच बार के विधायक रहे अजय सिंह का कद इन दिनों विंध्य अंचल में खासा बढ़ा है. इस कद को कम कर भाजपा यहां पर अपना प्रभाव बनाना चाहती है. इसके चलते भी अजय सिंह का पारिवारिक विवाद चौराहे तक पहुंचा. हालांकि अजय सिंह खुद इसके लिए भाजपा को दोषी बता चुके हैं और वे यह भी कह चुके हैं कि राजनीतिक षडयंत्र हैं. अजय सिंह का कहना है कि इस षडयंत्र में उनकी अपनी बहन वीणा सिंह भी शामिल है.

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें