कक्काजी ने कहा बांड भरें शिवराज और उनके मंत्री, किसानों से क्यों भराएं बांड
राष्ट्रीय किसान मजदूर यूनियन के संरक्षक शिवकुमार शर्मा कक्काजी ने कहा कि सरकार बार-बार यह कहकर कि ये किसानों का आंदोलन नहीं है, बल्कि कांग्रेस का आंदोलन है, किसानों का अपमान कर रही है. उन्होंने कहा कि हम अहिंसक है, लेकिन सरकार हिंसा भड़काने का काम कर रही है.
यह बात शर्मा ने आज राजधानी में पत्रकारों से चर्चा करते हुए कही. उन्होंने कहा कि किसानों से बांड भरवाए गए, जबकि ये बांड तो शिवराज को और उनके मंत्रियों को भरना चाहिए. मंदसौर गोलीकांड में जैन आयोग क रिपोर्ट अब तक क्यों नहीं आई, आयोग की रिपोर्ट मुख्यमंत्री निवास पर तैयार हो रही है. उन्होंने कहा कि व्यापारियों से 10 जून को दोपहर 2 बजे तक का हमने आह्वान किया है. उन्होंने सरकार पर आरोप गाया कि सरकार आंदोलन को हिंसक बनाने का काम कर ही है. किसान तो शांतिपूर्वक अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहा है. शर्मा ने कहा कि पुलिस की निगरानी में दूध, सब्जी मंडी में पहुंचाने पर किसान और भड़केगा.
पार्टी का झंडा छोडकर दें राजनीतिक दल समर्थन
किसान आंदोलन को कांग्रेस का आंदोलन बताने पर उन्होंने कहा कि विपक्ष की भूमिका चौकीदार की होती है. प्रदेश की विपक्षी पार्टी अपना फर्ज निभा रही है, लेकिन ये आंदोलन कांग्रेस का नहीं है. किसानों का है. उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल को आंदोलन में वे नहीं आने देंगे. अगर हमारा समर्थन करना है तो पार्टी का झंडा छोड़कर हमारे साथ आना होगा.
सरकार की मंशा आंदोलन को हिंसक बनाना
राजधानी में पत्रकारों से चर्चा करते हुए कक्काजी ने कहा कि मध्यप्रदेश में 43 प्रतिशत आत्महत्या बढ़ी है. कां्रगेस पर आरोप लगाकर सरकार अपनी जिम्मेदारी से हट रही है. सरकार फर्जी वीडियो जारी कर जनता को भ्रमित करने का काम कर रही है. उन्होंने कहा कि आंदोलन में 130 किसान संगठन शामिल हैं और सभी एकजुट भी हैं. इस बार हम गांव में रहेंगे, सिर्फ भाजपा समर्थन कुछ संघटन इसमें शामिल नहीं है. हम चौपाल लगाकर गांव में सामान देंगे. आंदोलन हिंसक न हो, इसलिए हमने पूरी कोशिश की है कि सरकार की मंशा इसे हिंसक बनाने की लग रही है, हम उसे कामयाब नहीं होने देना चाहते हैं.
10 जून को भारत बंद
राजधानी में पत्रकारों से चर्चा करते हुए शिवकुमार शर्मा ने कहा कि 10 जून को भारत बंद का आह्वान किया है. उन्होंने कर्मचारियों, व्यापारियों सहित अन्य लोगों से भी अपील की है कि पहली बार अन्नदाता भारत बंद का आह्वान कर रहा है तो 10 जून को दोपहर 2 बजे तक सभी अपने प्रतिष्ठान को बंद रखकर,जिन किसानों पर गोली चली थी, उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि दें. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान से शक्कर बुलाई जा रही है और राष्ट्रवाद की बातें करते हैं. मध्यप्रदेश के गन्ना किसानों को 4 सौ करोड़ रुपए का भुगतान सात माह से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी नहीं किया गया. एक प्रश्न के जवाब में उन्होंने कहा कि उन्होंने कहा कि अगर आंदोलन के दौरान उनकी गिरफ्तारी हो जाती है तो हरियाणा के गुरुनाम सिंह आंदोलन की बागडोर संभालेंगे. 11 जून को भोपाल में महासंघ की बैठक होगी, इसमें आंदोलन की अगली रणनीति बनाई जाएगी.
राजधानी की सीमाओं पर तैनात रहा पुलिस बल
किसान आंदोलन को देखते हुए आज सुबह से ही राजधानी भोपाल की सीमाओं पर पुलिस बल की तैनाती कर दी गई थी. विशेषकर सीहोर के रास्ते पर अधिक संख्या में जवान तैनात किए गए थे. इस रोड पर बैरियर और पेट्रोल पंपों पर भी जवान तैनात किए गए थे. इसके पीछे मुख्य कारण यह था कि बीते वर्ष जब किसानों का आंदोलन हुआ था, तब फंदा, बैरसिया, खजूरी सहित अन्य गांवों में आंदोलनकारियों की सक्रियता ज्यादा थी. आज पुलिस बल की तैनाती के चलते यहां पर माहौल में शांति देखी गई. आंदोलन को देखते हुए पुलिस की पांच कंपनियों की तैनाती की गई है.
दहशत भी दिखी, व्यापारियों तक नहीं पहुंचा माल
राजधानी में किसान आंदोलन को लेकर किसानों में आंदोलन से ज्यादा दहशत भी दिखाई दी. इसके चलते किसान मंडियों तक अपना माल नहीं पहुंचा पाए, इसके चलते व्यापारियों को अपने यहां स्टाक किया हुआ माल ही बेचना पड़ा. पुलिस बल की तैनाती और पूर्व के आंदोलन के दौरान हुई हिंसा के चलते किसानों में आज भय भी दिखाई दिया. अधिकांश किसान न तो दूध लेकर शहर पहुंचे और न ही सब्जियां उन्होंने शहर पहुंचाई. कुछ किसानों का कहना था कि आज आंदोलन का पहला दिन था, जिसके चलते उन्होंने यह कदम उठाना उचित समझा. राजधानी भोपाल के अलावा होशंगाबाद, विदिशा और सीहोर सहित अन्य शहरों में भी इसी तरह का माहौल निर्मित रहा.
किसानों की प्रमुख 4 मांगें
* सभी किसानों का संपूर्ण कर्जा माफ किया जाए.
* सभी फसलों पर लागत के आधार पर डेढ़ गुना लाभकारी मूल्य दिया जाए.
* सभी किसानों को 55 साल की उम्र के बाद पेंशन दी जाए एवं किसानों की आय सुनिश्चित की जाए।
* दूध का 65 लीटर एवं फल सब्जी के समर्थन मूल्य घोषित किया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए।
बंद का कार्यक्रम इस तरह
* 1 से 10 जून गांव बंद
* 5 जून को धिक्कार दिवस
* 6 जून को किसान शहादत दिवस
* 8 जून को असहयोग दिवस
* 10 को जून भारत बंद
राष्ट्रीय किसान मजदूर यूनियन के संरक्षक शिवकुमार शर्मा कक्काजी ने कहा कि सरकार बार-बार यह कहकर कि ये किसानों का आंदोलन नहीं है, बल्कि कांग्रेस का आंदोलन है, किसानों का अपमान कर रही है. उन्होंने कहा कि हम अहिंसक है, लेकिन सरकार हिंसा भड़काने का काम कर रही है.
यह बात शर्मा ने आज राजधानी में पत्रकारों से चर्चा करते हुए कही. उन्होंने कहा कि किसानों से बांड भरवाए गए, जबकि ये बांड तो शिवराज को और उनके मंत्रियों को भरना चाहिए. मंदसौर गोलीकांड में जैन आयोग क रिपोर्ट अब तक क्यों नहीं आई, आयोग की रिपोर्ट मुख्यमंत्री निवास पर तैयार हो रही है. उन्होंने कहा कि व्यापारियों से 10 जून को दोपहर 2 बजे तक का हमने आह्वान किया है. उन्होंने सरकार पर आरोप गाया कि सरकार आंदोलन को हिंसक बनाने का काम कर ही है. किसान तो शांतिपूर्वक अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहा है. शर्मा ने कहा कि पुलिस की निगरानी में दूध, सब्जी मंडी में पहुंचाने पर किसान और भड़केगा.
पार्टी का झंडा छोडकर दें राजनीतिक दल समर्थन
किसान आंदोलन को कांग्रेस का आंदोलन बताने पर उन्होंने कहा कि विपक्ष की भूमिका चौकीदार की होती है. प्रदेश की विपक्षी पार्टी अपना फर्ज निभा रही है, लेकिन ये आंदोलन कांग्रेस का नहीं है. किसानों का है. उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल को आंदोलन में वे नहीं आने देंगे. अगर हमारा समर्थन करना है तो पार्टी का झंडा छोड़कर हमारे साथ आना होगा.
सरकार की मंशा आंदोलन को हिंसक बनाना
राजधानी में पत्रकारों से चर्चा करते हुए कक्काजी ने कहा कि मध्यप्रदेश में 43 प्रतिशत आत्महत्या बढ़ी है. कां्रगेस पर आरोप लगाकर सरकार अपनी जिम्मेदारी से हट रही है. सरकार फर्जी वीडियो जारी कर जनता को भ्रमित करने का काम कर रही है. उन्होंने कहा कि आंदोलन में 130 किसान संगठन शामिल हैं और सभी एकजुट भी हैं. इस बार हम गांव में रहेंगे, सिर्फ भाजपा समर्थन कुछ संघटन इसमें शामिल नहीं है. हम चौपाल लगाकर गांव में सामान देंगे. आंदोलन हिंसक न हो, इसलिए हमने पूरी कोशिश की है कि सरकार की मंशा इसे हिंसक बनाने की लग रही है, हम उसे कामयाब नहीं होने देना चाहते हैं.
10 जून को भारत बंद
राजधानी में पत्रकारों से चर्चा करते हुए शिवकुमार शर्मा ने कहा कि 10 जून को भारत बंद का आह्वान किया है. उन्होंने कर्मचारियों, व्यापारियों सहित अन्य लोगों से भी अपील की है कि पहली बार अन्नदाता भारत बंद का आह्वान कर रहा है तो 10 जून को दोपहर 2 बजे तक सभी अपने प्रतिष्ठान को बंद रखकर,जिन किसानों पर गोली चली थी, उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि दें. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान से शक्कर बुलाई जा रही है और राष्ट्रवाद की बातें करते हैं. मध्यप्रदेश के गन्ना किसानों को 4 सौ करोड़ रुपए का भुगतान सात माह से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी नहीं किया गया. एक प्रश्न के जवाब में उन्होंने कहा कि उन्होंने कहा कि अगर आंदोलन के दौरान उनकी गिरफ्तारी हो जाती है तो हरियाणा के गुरुनाम सिंह आंदोलन की बागडोर संभालेंगे. 11 जून को भोपाल में महासंघ की बैठक होगी, इसमें आंदोलन की अगली रणनीति बनाई जाएगी.
राजधानी की सीमाओं पर तैनात रहा पुलिस बल
किसान आंदोलन को देखते हुए आज सुबह से ही राजधानी भोपाल की सीमाओं पर पुलिस बल की तैनाती कर दी गई थी. विशेषकर सीहोर के रास्ते पर अधिक संख्या में जवान तैनात किए गए थे. इस रोड पर बैरियर और पेट्रोल पंपों पर भी जवान तैनात किए गए थे. इसके पीछे मुख्य कारण यह था कि बीते वर्ष जब किसानों का आंदोलन हुआ था, तब फंदा, बैरसिया, खजूरी सहित अन्य गांवों में आंदोलनकारियों की सक्रियता ज्यादा थी. आज पुलिस बल की तैनाती के चलते यहां पर माहौल में शांति देखी गई. आंदोलन को देखते हुए पुलिस की पांच कंपनियों की तैनाती की गई है.
दहशत भी दिखी, व्यापारियों तक नहीं पहुंचा माल
राजधानी में किसान आंदोलन को लेकर किसानों में आंदोलन से ज्यादा दहशत भी दिखाई दी. इसके चलते किसान मंडियों तक अपना माल नहीं पहुंचा पाए, इसके चलते व्यापारियों को अपने यहां स्टाक किया हुआ माल ही बेचना पड़ा. पुलिस बल की तैनाती और पूर्व के आंदोलन के दौरान हुई हिंसा के चलते किसानों में आज भय भी दिखाई दिया. अधिकांश किसान न तो दूध लेकर शहर पहुंचे और न ही सब्जियां उन्होंने शहर पहुंचाई. कुछ किसानों का कहना था कि आज आंदोलन का पहला दिन था, जिसके चलते उन्होंने यह कदम उठाना उचित समझा. राजधानी भोपाल के अलावा होशंगाबाद, विदिशा और सीहोर सहित अन्य शहरों में भी इसी तरह का माहौल निर्मित रहा.
किसानों की प्रमुख 4 मांगें
* सभी किसानों का संपूर्ण कर्जा माफ किया जाए.
* सभी फसलों पर लागत के आधार पर डेढ़ गुना लाभकारी मूल्य दिया जाए.
* सभी किसानों को 55 साल की उम्र के बाद पेंशन दी जाए एवं किसानों की आय सुनिश्चित की जाए।
* दूध का 65 लीटर एवं फल सब्जी के समर्थन मूल्य घोषित किया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए।
बंद का कार्यक्रम इस तरह
* 1 से 10 जून गांव बंद
* 5 जून को धिक्कार दिवस
* 6 जून को किसान शहादत दिवस
* 8 जून को असहयोग दिवस
* 10 को जून भारत बंद

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