मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने दिए निर्देष, दोषियों पर की जाए सख्त कार्रवाई
भोपाल । 3 सितंबर
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान ने प्रदेष के बालाघाट और मंडला जिले में वितरित किए गुणवत्ता विहीन चावल मामले की जांच ईओडब्ल्यू से कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि इस मामले में दोशियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने बालाघाट एवं मंडला जिलों में कुछ स्थानों पर गुणवत्ता विहीन चावल प्रदाय के प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। राशन व खाद की गड़बड़ी या कालाबाजारी करने वालों को बिल्कुल नहीं बख्शा जाएगा। उन्होंने कहा कि घटिया चावल को राशन की दुकानों तक पहुंचाने वाले दोषियों को किसी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) मामले की जांच कर साक्ष्यों को सामने जाएगा। सत्य उजागर होना चाहिए। आगे ऐसी संभावना को निर्मूल करने के लिए दोषियों के विरुद्ध सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बालाघाट एवं मंडला जिलों के चावल की गुणवत्ता जांच के कार्य के लिए जिम्मेदार गुणवत्ता नियंत्रकों की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं और बालाघाट के जिला प्रबंधक को निलंबित कर दिया गया है। संबंधित मिलर्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है।
दोशी गुणवत्ता नियंत्रकों की सेवाएं की समाप्त, मिलर्स के खिलाफ एफआईआर
मुख्यमंत्री को अधिकारियों ने बताया कि मामले में बालाघाट जिले के 3 गोदामों का निरीक्षण किया गया। इसमें 3136 मेट्रिक टन तथा मंडला जिले में 1658 मेट्रिक टन चावल निर्धारित मानकों का नहीं पाया गया। दोनों जिलों के निरीक्षण के बाद गोदामों से चावल का प्रदाय और परिवहन बंद किया गया है। मुख्यमंत्री द्वारा सख्त कार्रवाई के निर्देश के पालन में प्रदेश में सेम्पल लेने की कार्रवाई जारी है। कुल 51 संयुक्त दल गठित कर भंडारित चावल के एक हजार से अधिक सेम्पल लिए जा चुके हैं। इनमें से 284 की जाँच प्रारंभ की गई है। भारतीय खाद्य निगम के स्थानीय कार्यालयों से मिली जानकारी के अनुसार 72 सेम्पल वितरण योग्य हैं, जबकि 57 सेम्पल मानकों के अनुरूप नहीं है। प्रदेश के अन्य जिलों से चावल की शेष मात्रा में से सेम्पल लेने का कार्य भी इस सप्ताह कर लिया जाएगा। दोषी गुणवत्ता नियंत्रकों की सेवाएं समाप्त करने की कार्रवाई भी की गई है। निम्न गुणवत्ता का चावल प्रदाय करने वाले मिलर्स के गोदाम एवं मिलों की जांच भी की जा रही है। संबंधित मिलर्स के खिलाफ एफ.आई.आर. भी दर्ज की गई है।
उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में कोरोना काल को अवसर में बदलने जो घटिया काम गरीबों के साथ किया गया है उसकी शिकायत वे राष्ट्पति और प्रधानमंत्री से करेंगे। जनता के स्वास्थ्य के साथ किये गये इस खिलवाड़ के कारण प्रदेश की राष्ट्रीय स्तर पर बदनामी हुई है।
मुख्यमंत्री ने लोगों की आंखों में झोंका धूल
पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने कहा इतने बड़े प्रकरण में केवल एक अधिकारी को सस्पेंड कर और अन्य से दो संविदा कर्मियों को नौकरी से निकालकर शिवराज सिंह ने लोगों की आंखों में धूल झोंकने का ही काम किया है। मैने पांच दिन पहले विगत 30 अगस्त को मीडिया के माध्यम से इस पूरे प्रकरण को उजागर करते हुए सीबीआई जांच की मांग की थी। केन्द्र सरकार विगत 23 जुलाई से मध्य प्रदेश सरकार को लगातार लिख रही है कि गधे, घोड़ों, भेड़, बकरियों और मुर्गियों को खिलाने लायक इस चावल को बांटने पर तत्काल रोक लगाई जाये । आश्चर्य है कि शिवराज सिंह ने इस पत्र पर षडयंत्रपूर्वक कोई कार्यवाही नही की। उल्टे तथाकथित 37 लाख नये गरीबों को यह चावल बांटने के लिए समारोह पूर्व पर्ची बांटने के निर्देश सभी कलेक्टरों और पूर्व पंचायत प्रतिनिधियों को पत्र भेजकर दिये है।
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