कमलनाथ ने खुद संभाली कमान, भाजपा षिवराज, ज्योतिरादित्य की जोड़ी मैदान में
मध्यप्रदेष में 28 सीटों पर होने वाले उपचुनाव को लेकर ग्वालियर चंबल अंचल की सीटों पर कांग्रेस सेंधमारी की तैयारी कर चुकी है। ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रभाव वाली इन सीटों पर कांग्रेस फिर से कब्जा जमाने के लिए पूरी ताकत के साथ लगी हुई है। उपचुनाव की कमान कांग्रेस की ओर से खुद प्रदेष कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ संभाले हुए हैं। वहीं भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री षिवराज सिंह चैहान के साथ ज्योतिरादित्य सिंधिया इस क्षेत्र में जमकर मेहनत कर सिंधिया समर्थकों की जीत के लिए मैदानी मोर्चा संभाले हुए हैं। देखना यह है कि बिना महाराज के कांग्रेस इन सीटों पर कैसे अपना कब्जा जमाएगी।
मध्यप्रदेष में चुनाव आयोग ने अभी उपचुनाव की तारीखों का ऐलान तो नहीं किया है, मगर संभावना इस बात की है कि 29 सितंबर को इसका फैसला हो जाएगा। इसके पहले दोनों ही दल भाजपा और कांग्रेस पूरी ताकत के साथ मैदान में हैं। कांग्रेस की ओर से स्वयं कमलनाथ ने मोर्चा संभाला हुआ है। वे ज्योतिरादित्य सिंधिया के माने जाने वाले ग्वालियर चंबल अंचल के गढ़ में सेंधमारी की पूरी तैयारी कर चुके हैं। उन्होंने अपने पसंददीदा नेताओं की तैनाती भी की है, जो इस अंचल की सभी 16 सीटों पर मैदानी मोर्चा संभाले हुए है। प्रदेष कांग्रेस अध्यक्ष का प्रयास है कि कांग्रेस के पक्ष वाली रही इन सीटों के परिणाम एक बार फिर कांग्रेस के पक्ष में ही आएं, याने सभी 16 सीटों पर कांग्रेस की जीत हो और वे ज्योतिरादित्य सिंधिया के गढ़ में अपनी ताकत दिखाने में सफल रहें। इसके लिए वे प्रियंका गांधी, राहुल गांधी और सचिन पायलट जैसे युवा नेताओं को मैदान में उतारने की तैयारी कर चुके हैं।
वहीं भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री षिवराज सिंह चैहान और ज्योतिरादित्य सिंधिया स्वयं कमान संभाले हुए हैं। इनके अलावा केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर भी सक्रियता दिखा रहे है। इन नेताओं ने अब तक प्रायः सभी 16 सीटों पर पहुंचकर मतदाताओं के अलावा भाजपा नेताओं से संपर्क कर यह प्रयास किया कि उनकी नाराजगी को दूर किया जाए। वहीं सरकारी भूमिपूजन और षिलान्यास के जरिए षिवराज सिंह चैहान एक बार फिर जनता के बीच अपनी पुरानी छवि के चलते मतदाता को लुभाने का प्रयास कर रहे हैं ।
नेताओं की नाराजगी भाजपा के लिए संकट
कांग्रेस नेताओं का मानना है कि ग्वालियर चंबल अंचल में कांग्रेस की तरफ से कोई व्यक्ति विशेष नहीं, बल्कि पार्टी के दम पर वोट मिल रहे है जो भाजपा की हार को पुख्ता कर रहे है। ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में सिंधिया प्रभाव की 16 सीटें हैं, लेकिन अधिकांश इलाकों में सिंधिया के साथ भाजपा नेताओं के प्रति खासा रोष देखा जा रहा है। कई इलाके तो ऐसे हैं जहां कांग्रेस की तरफ से जीते हुए वे विधायक जो अब भाजपा के खेमे में जा चुके हैं, उनकी एंट्री तक बंद कर दी गई है, या उनके खिलाफ अच्छी खासी नाराजगी है।
संघ के सर्वे से चिंतित है भाजपा
उपचुनाव को लेकर कांग्रेस 15 प्रत्याशियों का चयन कर चुकी है जबकि भाजपा की ओर से 25 उम्मीदवार करीब करीब फाइनल हैं। तीन सीटों पर गहन मंथन जारी है। इसी बीच आरएसएस के द्वारा करवाए गए एक सर्वे की आई रिपोर्ट के बाद भाजपा की चिंता बढ़ गई है। सर्वे रिपोर्ट में भाजपा 28 में से केवल एक सीट पर जीत दर्ज करने की बात सामने आई है। वहीं सर्वे में 27 सीटों पर कांग्रेस के उम्मीदवार जीत रहे हैं। चूकिं यह सर्वे आरएसएस द्वारा कराया गया है इसलिए इस बात से भाजपा की चिंता और भी बढ़ गई है। यही वजह है कि संघ भी उपचुनाव को गंभीरता से ले रहा है और लगातार संघ पदाधिकारी अपनी सक्रियता दिखा रहे हैं।
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