बुधवार, 16 सितंबर 2020

उपचुनाव में आसान नहीं कांग्रेस की राह


भाजपा को चाहिए 8 सीटों पर जीत, कांग्रेस को जीतना होगा पूरी 28 सीट

मध्यप्रदेष में अब 28 सीटों के लिए उपचुनाव होने है। इन सीटों पर दोनों ही दलों ने तैयारी के साथ मैदान में उतरना षुरू कर दिया है। कांग्रेस से ज्यादा भाजपा के नेता मैदान में दिखाई दे रहे हैं। जबकि कांग्रेस की ओर से प्रदेष कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ अकेले ही मोर्चा संभाले हुए हैं। कांग्रेस के लिए राह मुष्किल है, मगर कमलनाथ हौंसले के साथ मैदानी मोर्चा संभाल रहे है।जबकि भाजपा को इस चुनाव में 9 सीटों पर जीत हासिल करने की चुनौती है, मगर वह बड़े नेताओं के साथ मैदान में मोर्चा संभाले हुए है।
मध्यप्रदेष में 28 सीटों के लिए होने वाले उपचुनाव को लेकर कांग्रेस के प्रदेष अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ यह दावा जरूर कर रहे हैं, कि कांग्रेस सभी सीटों पर जीत हासिल करेगी, मगर पार्टी की मैदानी तैयारियां कुछ और ही बयां कर रही है। फिलहाल मोर्चे पर पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और उनकी टीम ही नजर आ रही है, जबकि दिग्विजयसिंह और अन्य नेता मैदान से दूर नजर आ रहे है। वहीं भाजपा ने पूरी ताकत लगा दी है। केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर, पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती, मुख्यमंत्री षिवराज सिंह चैहान, राज्यसभा  सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया सहित प्रदेष संगठन के नेता मैदान में सक्रियता दिखा रहे हैं।  ग्वालियर चंबल अंचल की अधिकांष सीटों पर ये नेता पहुंचकर कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों से सीधे चर्चा कर चुके है। वहीं कांग्रेस की ओर से सिर्फ कमलनाथ ने अब तक आगर मालवा और सांवेर में उपचुनाव का ष्षंखनाद किया है, वहीं ग्वालियर चंबल में उनके समर्थक नेताओं की सक्रियता ही दिखाई दे रही है।
दरअसल, ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनके समर्थक विधायकों के इस्तीफे के बाद 25 सीटें खाली हो गई थी, जबकि 2 सीटें विधायकों के निधन के कारण खाली थी। इसी बीच अब राजगढ़ के कांग्रेस विधायक  के निधन के बाद एक सीट और खाली हो गई हैं। जिसके बाद अब मध्यप्रदेष में 28 सीटों पर उपचुनाव होंगे।
यह है चुनावी समीकरण
वर्तमान में भाजपा  के पास 107 और कांग्रेस के पास 88 विधायक बचे हैं। जहां भाजपा को सरकार बनाए रखने के लिए 9 सीटों की जरुरत हैं। वही कांग्रेस को 28 सीटे ही जीतना हैं। मध्यप्रदेश के इतिहास में यह पहला मौका है जब उपचुनाव में एक साथ 28 सीटों पर चुनाव होना हैं। इनमें कांग्रेस को सभी 28 सीटें जीतने पर ही सरकार बनाने का मौका मिल सकता है, जबकि भाजपा को सिर्फ 9 सीटों पर जीत का परचम फहराने पर सरकार में रहने का अवसर मिल जाएगा। 

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