बुधवार, 16 सितंबर 2020

चुनावी घोषणा बनकर रह जाएगा अन्न उत्सव


पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ का सरकार पर हमला

पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने प्रदेष में ष्षुरू किए अन्न उत्सव को लेकर भाजपा और सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि अन्न उत्सव भी चुनावी घोशणा बनकर रह जाएगा।
मुख्यमंत्री षिवराज सिंह चैहान ने आज अन्न उत्सव का ष्षुभारंभ किया। इसे लेकर कांग्रेस पहले से ही हमलवार है। वहीं आज पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी योजना को लेकर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने सरकार से मांग करते हुए कहा कि शिवराज सरकार यह बताएं कि उस हिसाब ने 37 लाख नये लाभार्थियो के लिए अतिरिक्त खाद्यान्न की उन्होंने क्या व्यवस्था की है ? क्या यह अन्य घोषणाओं की तरह सिर्फ चुनावी घोषणा बन कर रह जायेगी? उपभोक्ताओं के हित में हमारी सरकार ने कई उल्लेखनीय निर्णय लिये थे।
उन्होंने कहा है कि भाजपा आज 37 लाख नये लाभार्थियो को शामिल कर प्रदेश भर में अन्न उत्सव मना रही है। जबकि सच्चाई यह है कि हमारी सरकार ने पहले वर्ष में ही राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत उपभोक्ता सूची में पूर्व में सम्मिलित परिवारों के सत्यापन, अपात्र परिवारों को हटाकर छूटे हुए वास्तविक गरीब परिवारों को सूची में जोडने का काम प्रारंभ किया था, जो कार्य पिछले कई वर्षों से नहीं हुआ था। पूर्व मुख्यमंत्री  ने कहा है कि अधिनियम में शामिल 117.52 पात्र परिवारों के 5 करोड़ 46 लाख हितग्राहियों का घर- घर जाकर सत्यापन का व छूटे वास्तविक गरीब परिवारों के नाम जोडने के अभियान का कार्य हमारी सरकार ने ही शुरू करवाया था। बायोमेट्रिक सत्यापन के आधार पर राशन का विवरण 18 लाख से बढ़ाकर 76.93 परिवारों को माह अक्तूबर 2019 में देने का कार्य हमारी सरकार ने ही किया था।
उन्होंने बताया कि समाज के गरीब तबके के लोगों को जीवन यापन में सहूलियत देने के उद्देश्य से हमारी सरकार ने रियायती दरों पर खाद्यान्न व अन्य सुविधाएं देना शुरू किया था। पोर्टेबिलिटी योजना के तहत हमारी सरकार ने हितग्राही को किसी भी राशन की दुकान से खाद्यान्न लेने की सुविधा भी प्रदान की थी। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 के अंतर्गत वर्ष 2011 की जनसंख्या के अनुसार प्रदेश की 75 प्रतिशत आबादी यानी 5 करोड़ 46 लाख को ही लाभान्वित करने का प्रावधान था। हमारी सरकार ने वर्ष 2018 की बढ़ी हुई अनुमानित जनसंख्या के आधार पर बचे 9 प्रतिशत यानि 71 लाख हितग्राहियों हेतु अतिरिक्त खाद्यान्न आवंटन करने की मांग भी भारत सरकार से की थी।

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