बुधवार, 1 जुलाई 2020

फूट और अंतर्कलह होगी बड़ी चुनौती


मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर उठे तूफान में कांग्रेस देख रही अपना फायदा

मध्यप्रदेश में शिवराज मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर जो तूफान उठा है, वह मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान के लिए मुसीबत बन सकता है। कांग्रेस इस अंतर्कलह में अपना फायदा देख रही है। सिंधिया समर्थकों को अगर ज्यादा तब्बजो मिली और वरिष्ठ विधायकों की अनदेखी हुई तो प्रदेष संगठन के सामने उपचुनाव में ग्वालियर अंचल की 16 सीटें भी मुसीबत खड़ी करेगी।
लंबी जददोजहद के बाद यह तो तय हो गया कि शिवराज गुरुवार को अपने गणों को शपथ दिलाएंगे। केन्द्रीय नेताओं के दबाव के चलते शिवराज इस विस्तार को लेकर ज्यादा खुश नजर नहीं आ रहे है। केन्द्र के फैसले के अनुसार सिंधिया समर्थकों के अलावा विस्तार में नए चेहरों को ज्यादा तबज्जों मिलने की बात सामने आ रही हैं। इस लिहाज से मुख्यमंत्री के सामने विस्तार के बाद पार्टी के अंदर फूट और अंतर्कलह बढ़ने की ज्यादा संभावना नजर आती है। यह उनकी चिंता का कारण भी है। विस्तार में मुख्यमंत्री जिन्हें मंत्री बनाना चाहते थे, संभवतः उनके नामों पर केन्द्रीय नेतृत्व संतुष्ट नहीं है। केन्द्र के इस फैसले का सीधा असर मंत्रिमंडल विस्तार के बाद विधायकों के बागी तेवर देखने को मिले  तो उपचुनाव मेंग्वालियर चंबल में जहां 16 सीटे पार्टी के लिए मुश्किल खड़ी करेंगी। इन सीटों पर जीत मुश्किलें हो सकती है।
कांग्रेस देख रही अपना फायदा
विस्तार को लेकर जिस तरह से उठापटक चली उसमें कांग्रेस अपना फायदा देख रही है। कांग्रेस का मानना है कि सिंधिया समर्थकांे को ज्यादा तबज्जो देने और भाजपा के वरिष्ठ विधायकों की अनदेखी करने से उसे सीधा फायदा होगा। कांग्रेस का मानना है कि विस्तार के बाद नाराज विधायक पार्टी से बगावत भी कर सकते है, या फिर अंतर्कलह तेज होगी। इसका सीधा असर उपचुनाव में देखने को मिलेगा। कांग्रेस को उम्मीद है कि अगर ऐसा हुआ तो वह अधिक सीटें जीतकर सत्ता में वापसी की राहत आसान कर सकती है।
निर्दलीय, सपा, बसपा को भी साधना होगा मुश्किल
मंत्रिमंडल विस्तार में अब तक जो खबरे सामने आ रही हैं, उनमें यह बात निकल कर सामने आ रही है कि निर्दलीय, सपा और बसपा विधायकों को मंत्रिमंडल में स्थान नहीं मिल रहा है। अगर ऐसा होता है कि तो ये फिर सरकार के लिए संकट खड़ा करेंगे। बसपा वैसे भी ग्वालियर अंचल में उपचुनाव अपने बूते पर याने सभी 16 सीटों पर प्रत्याषी मैदान में उतारने की बात कह चुकी है। वहीं सपा और निर्दलीय विधायक नाराज होकर फिर से कांग्रेस के पाले मंे जा सकते हैं।

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