मंगलवार, 18 सितंबर 2018

2 विधायक ही उपस्थिति रहे पूरे समय

 पचास दिन कम हुई मध्यप्रदेश विधानसभा की बैठकें
मध्यप्रदेश की विधानसभा अपनी निर्धारित बैठकों से 50 दिन कम चली है. राज्य विधानसभा में सिर्फ दो ही विधायक ऐसे थे, जिनकी उपस्थित सौ फीसदी रही, जबकि 131 विधायक ऐसे रहे जिनकी उपस्थित 76 से 100 फीसदी के बीच रही. 
यह जानकारी आज मध्यप्रदेश इलेक्शन वाच की रौली शिवहरे में पत्रकारों से चर्चा में दी. उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश इलेक्शन वाच ने 179 विधायकों की उपस्थित का विश्लेषण किया है, जो कि वर्ष 2013 में चुनकर आए हैं. इस विश्लेषण में प्रदेश की एकमात्र एंग्लो इंडियन विधायक लारेन लोबो की उपस्थिति का भी विवरण है. उन्होंने बताया  कि 14वीं विधानसभा के 17 सत्रों की कुल अवधि 315 दिन थी, जबकि 2009 से 2013 के बीच चली 13वीं विधानसभा में 167 दिनों की बैठक हुई थी. यानि 14वीं विधानसभा पिछली विधानसभा से 32 दिन कमल चली. विधानसभा के 187 दिनों की बैठक योजना बनाई गई थी, लेकिन सिर्फ 137 दिन बैठक हुई जो कि 50 दिन कम है. इस विधानसभा में कुल 17 सत्र हुए. प्रतिवर्ष औसतन 27 दिन बैठक हुई. सबसे लम्बा सत्र 10वां था जो कि 23 फरवरी 2016 से शुरू होकर एक अप्रैल 2016 तक चला. इसमें 22 बैठकें हुईं थीं.
रौली ने  बताया कि विधानसभा सत्र में केवल 2 विधायक (ममता मीना भाजपा चचौरा विधानसभा और शैलेन्द्र पटेल कांग्रेस इछावर विधानसभा), ऐसे हैं जिनकी उपस्थित 100 प्रतिशत है. 131 विधायक ऐसे हैं जिनकी उपस्थिति 76 से 100 प्रतिशत, 38 विधायकों की 51 से 75 प्रतिशत और 9 की 26 से 50 प्रतिशत दर्ज की गई है. एकमात्र एंग्लो इंडियन विधायक लारेन लोबो और कांग्रेस विधायक कमलेश शाह की उपस्थित सिर्फ 20 प्रतिशत रही.
उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश इलेक्शन वाच की मांग है कि संसदीय लोकतंत्र में विधायकों की सदन में कम से कमल 75 प्रतिशत हाजिरी का नियम बनाया जाए. निर्धारित न्यूनतम उपस्थिति न होने पर किसी भी तरह के दंड का प्रावधान रखा जाए. जिस प्रकार संसद में सांसदों की उपस्थिति पर निगरानी करने के लिए एक समिति बनाई गई है, इसी प्रकार राज्य विधानसभा में भी इस प्रकार की समिति का गठन किया जाए. साथ ही समस्त मंत्री, विधायक, अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष को उपस्थिति पत्रिका में हस्ताक्षर करना बंधनकारी किया जाए.

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