कांग्रेस के लिए भी खड़ी कर रहा है परेशानी
मध्यप्रदेश के विधानसभा चुनाव में संघ का गढ़ माने जाने वाला मालवा-निमाड़ इस बार संघ और भाजपा के लिए चिंता बन गया है. वहीं कांग्रेस के लिए भी यह अंचल परेशानी खड़ी कर रहा है. इस अंचल में सक्रिय जयस और सपाक्स संगठनों ने इन दलों की चिंता को बढ़ाया है.
मध्यप्रदेश का मालवा-निमाड़ अंचल की सरकार बनाने में खासा भागीदारी रही है. इस अंचल की 66 विधानसभा सीटों के नतीजे यह तय कर देते हैं कि किसकी सरकार बन रही है. यह अंचल वैसे तो संघ का गढ़ माना जाता रहा है. यही वजह है कि जब-जब भाजपा के पक्ष में इस अंचल की ज्यादा सीटें आई, सरकार भाजपा की बनी और जब यहां के मतदाता ने भाजपा से नाराजगी दिखाई तो सरकार कांग्रेस की बनी. भाजपा का गढ़ रहे इस अंचल में वर्ष 2008 के चुनाव में 66 सीटों में से 40 सीटें भाजपा ने जीती थी और 25 कांग्रेस ने. एक पर निर्दलीय का कब्जा था. वहीं 2013 में भाजपा की बढ़त 56 पर पहुंच गई और कांग्रेस यहां पर घटकर 12 सीटों पर समिट गई. यही वजह रही की भाजपा के को शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में 2008 के बाद से सरकार बनाने में कोई परेशानी नहीं हुई, मगर इस बार यह अंचल भाजपा के लिए चिंता बन गया है. संघ के पदाधिकारी भी इस बात को लेकर चिंतित. संघ की चिंता इस बात को लेकर है कि यहां पर भाजपा का जनाधार कम होता नजर आ रहा है. संघ के सर्वे के बाद जब इस बात की जानकारी सामने आई कि इस अंचल के मंदसौर में 2017 में हुए किसान आंदोलन भाजपा के लिए परेशानी बन रहा है. इसके अलावा अन्य मुद्दों ने भाजपा के जनाधार को यहां घटाया है. इसके बाद संघ मैदानी मोर्चा संभाले हुए है, मगर उसे मेहनत पिछले चुनाव से ज्यादा करनी पड़ रही है. भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने भी इस अंचल में पूरी ताकत लगाई है, मगर मतदाता का रुख अब तक उन्हें साफ नजर नहीं आ रहा है.
कांग्रेस के लिए भी खड़ी हो रही परेशानी
मालवा-निमाड़ अंचल भाजपा ही नहीं कांग्रेस के लिए भी परेशानी बना हुआ है. वैसे कांग्रेस की ओर से इस अंचल में चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष ज्योतिरादित्य सिंधिया और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह लगातार सक्रिय नजर आ रहे हैं. इसके अलावा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने भी यहां पर सक्रियता दिखाई है. राहुल गांधी भी मंदसौर में गोली कांड की बरसी पर बड़ी सभा कर किसानों के हित में घोषणाएं कर चुके हैं. इन घोषणाओं को कांग्रेस अपने वचन पत्र में शामिल भी कर रही है, लेकिन कांग्रेस को अब भी यहां पर अनुकूल परिणाम नजर नहीं आ रहा है.
जयस का प्रभाव सीटों ने खड़ी की मुसीबत
मालवा निमाड़ अंचल में इस बार जय युवा आदिवासी संगठन (जयस) के प्रभाव वाली सीटों ने भाजपा और कांग्रेस दोनों को चिंता में डाला है. जयस का प्रभाव इस अंचल की अनुसूचित जनजाति वर्ग की सीटों पर है. जयस के प्रमुख डा. हीरालाल अलावा ने जिस तरह से पिछले दिनों अपनी ताकत दिखाई और फिर यह घोषणा की कि वे अजजा वर्ग की सभी 47 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारेंगे. इससे इस वर्ग की सीटों पर भाजपा और कांग्रेस के समीकरण बिगड़गें. डा. अलावा का मालवा अंचल में विशेषकर अजजा वर्ग की सीटों पर खासा असर है. इसके चलते इस बार दोनों दलों की स्थिति यहां पर बिगड़ सकती है.
सपाक्स भी है सक्रिय
एट्रोसिटी एक्ट के विरोध में मध्यप्रदेश में सपाक्स संगठन ने जिस तरह से प्रदर्शन किया और भाजपा एवं कांग्रेस नेताओं का घेराव कर उनकी मुसीबतें बढ़ाई, इस संगठन के प्रमुख डा. हीरालाल त्रिवेदी खुद मालवा अंचल के बड़नगर के निवासी हैं. सपाक्स को संघ से जुड़ा ही माना जाता रहा है. इस संगठन से जुड़े पदाधिकारी भी इस अंचल में खासा प्रभाव रखते हैं. सपाक्स ने भी इस बार चुनाव में उतारने की घोषणा कर दी है. वह भी सभी 230 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारने की बात कह चुका है. इसके चलते साफ है कि सपाक्स यहां पर संघ और भाजपा के समीकरण को बिगाड़ेगा ही साथ ही इस संगठन से जुड़े सवर्ण वर्ग के मतदाता कांग्रेस की चिंता बन गए हैं.
मध्यप्रदेश के विधानसभा चुनाव में संघ का गढ़ माने जाने वाला मालवा-निमाड़ इस बार संघ और भाजपा के लिए चिंता बन गया है. वहीं कांग्रेस के लिए भी यह अंचल परेशानी खड़ी कर रहा है. इस अंचल में सक्रिय जयस और सपाक्स संगठनों ने इन दलों की चिंता को बढ़ाया है.
मध्यप्रदेश का मालवा-निमाड़ अंचल की सरकार बनाने में खासा भागीदारी रही है. इस अंचल की 66 विधानसभा सीटों के नतीजे यह तय कर देते हैं कि किसकी सरकार बन रही है. यह अंचल वैसे तो संघ का गढ़ माना जाता रहा है. यही वजह है कि जब-जब भाजपा के पक्ष में इस अंचल की ज्यादा सीटें आई, सरकार भाजपा की बनी और जब यहां के मतदाता ने भाजपा से नाराजगी दिखाई तो सरकार कांग्रेस की बनी. भाजपा का गढ़ रहे इस अंचल में वर्ष 2008 के चुनाव में 66 सीटों में से 40 सीटें भाजपा ने जीती थी और 25 कांग्रेस ने. एक पर निर्दलीय का कब्जा था. वहीं 2013 में भाजपा की बढ़त 56 पर पहुंच गई और कांग्रेस यहां पर घटकर 12 सीटों पर समिट गई. यही वजह रही की भाजपा के को शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में 2008 के बाद से सरकार बनाने में कोई परेशानी नहीं हुई, मगर इस बार यह अंचल भाजपा के लिए चिंता बन गया है. संघ के पदाधिकारी भी इस बात को लेकर चिंतित. संघ की चिंता इस बात को लेकर है कि यहां पर भाजपा का जनाधार कम होता नजर आ रहा है. संघ के सर्वे के बाद जब इस बात की जानकारी सामने आई कि इस अंचल के मंदसौर में 2017 में हुए किसान आंदोलन भाजपा के लिए परेशानी बन रहा है. इसके अलावा अन्य मुद्दों ने भाजपा के जनाधार को यहां घटाया है. इसके बाद संघ मैदानी मोर्चा संभाले हुए है, मगर उसे मेहनत पिछले चुनाव से ज्यादा करनी पड़ रही है. भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने भी इस अंचल में पूरी ताकत लगाई है, मगर मतदाता का रुख अब तक उन्हें साफ नजर नहीं आ रहा है.
कांग्रेस के लिए भी खड़ी हो रही परेशानीमालवा-निमाड़ अंचल भाजपा ही नहीं कांग्रेस के लिए भी परेशानी बना हुआ है. वैसे कांग्रेस की ओर से इस अंचल में चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष ज्योतिरादित्य सिंधिया और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह लगातार सक्रिय नजर आ रहे हैं. इसके अलावा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने भी यहां पर सक्रियता दिखाई है. राहुल गांधी भी मंदसौर में गोली कांड की बरसी पर बड़ी सभा कर किसानों के हित में घोषणाएं कर चुके हैं. इन घोषणाओं को कांग्रेस अपने वचन पत्र में शामिल भी कर रही है, लेकिन कांग्रेस को अब भी यहां पर अनुकूल परिणाम नजर नहीं आ रहा है.
जयस का प्रभाव सीटों ने खड़ी की मुसीबत
मालवा निमाड़ अंचल में इस बार जय युवा आदिवासी संगठन (जयस) के प्रभाव वाली सीटों ने भाजपा और कांग्रेस दोनों को चिंता में डाला है. जयस का प्रभाव इस अंचल की अनुसूचित जनजाति वर्ग की सीटों पर है. जयस के प्रमुख डा. हीरालाल अलावा ने जिस तरह से पिछले दिनों अपनी ताकत दिखाई और फिर यह घोषणा की कि वे अजजा वर्ग की सभी 47 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारेंगे. इससे इस वर्ग की सीटों पर भाजपा और कांग्रेस के समीकरण बिगड़गें. डा. अलावा का मालवा अंचल में विशेषकर अजजा वर्ग की सीटों पर खासा असर है. इसके चलते इस बार दोनों दलों की स्थिति यहां पर बिगड़ सकती है.
सपाक्स भी है सक्रिय
एट्रोसिटी एक्ट के विरोध में मध्यप्रदेश में सपाक्स संगठन ने जिस तरह से प्रदर्शन किया और भाजपा एवं कांग्रेस नेताओं का घेराव कर उनकी मुसीबतें बढ़ाई, इस संगठन के प्रमुख डा. हीरालाल त्रिवेदी खुद मालवा अंचल के बड़नगर के निवासी हैं. सपाक्स को संघ से जुड़ा ही माना जाता रहा है. इस संगठन से जुड़े पदाधिकारी भी इस अंचल में खासा प्रभाव रखते हैं. सपाक्स ने भी इस बार चुनाव में उतारने की घोषणा कर दी है. वह भी सभी 230 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारने की बात कह चुका है. इसके चलते साफ है कि सपाक्स यहां पर संघ और भाजपा के समीकरण को बिगाड़ेगा ही साथ ही इस संगठन से जुड़े सवर्ण वर्ग के मतदाता कांग्रेस की चिंता बन गए हैं.

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें