गुरुवार, 20 सितंबर 2018

राजधानी में सवर्ण समाज संगठन् उतरा सड़क पर निकाली रैली


मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में एक बार फिर एट्रोसिटी एक्ट के विरोध में आज सवर्ण समाज सड़कों पर उतरा. सवर्ण समाज के संगठनों ने रैली निकाली और भाजपा कार्यालय के समझ प्रदर्शन किया. इस दौरान चेतावनी भी दी कि अगर काला कानून वापस नहीं लिया तो विरोध और तेज कर दिया जाएगा.
मध्यप्रदेश में एट्रोसिटी एक्ट को लेकर उठा विरोध धमने का नाम नहीं ले रहा है. ग्वालियर-चंबल अंचल में इसका शुरुआति तौर पर खासा प्रभाव था, मगर अब राजधानी भोपाल सवर्ण वर्ग के संगठनों का केन्द्र बन गया है. सवर्ण संगठनों द्वारा आज राजधानी में जमकर प्रदर्शन किया गया. राजधानी में काला कानून विरोधी मोर्चा के नेतृत्व में सवर्ण संगठनों ने आज सुबह हबीबगंज नाका स्थित गणेश मंदिर से रैली की शुरुआत की. 
मोर्चा के संयोजक रघुनंदन शर्मा अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा के पुष्पेंद्र मिश्रा क्षत्रिय महासभा, करणी सेना, राजपूत समाज समेत कई संगठन प्रदर्शन में शामिल थे. जब  रैली के रुप में जब सवर्ण समाज के लोग भाजपा कार्यालय के सामने पहुंचे तो यहां पर उन्होंने जमकर प्रदर्शन किया. सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंच गई थी.  इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सरकार को दो महीने का समय दिया गया है. लोगों ने कहा कि हमारा विरोध किसी एक पार्टी के विरोध में नहीं है.  हम इस कानून को बनाने वालों के खिलाफ हैं. संसद में नेताओं ने इसे अपने फायदे के लिए पारित कर दिया. इस दौरान रैली निकालने की भी तैयारी रही हैं मध्यप्रदेश में हर दिन एसटी-एससी एक्ट को लेकर हर दिन किसी न किसी जगह विरोध प्रदर्शन हो रहा है. ये सभी मांग कर रहे हैं कि एट्रोसिटी एक्ट में किए गए संशोधन को वापस लिया जाए.  भाजपा कार्यालय के सामने राखी परमार, मीनाक्षी सिंह, अजय मिश्रा, पंडित राम गोपाल शर्मा जबलपुर, पुष्पेंद्र मिश्रा, चंदशेखर तिवारी, चिंटू पाठक, रघुनंदन शर्मा की पुलिस से जमकर बहस हुई. सवर्ण समाज के लोगों ने इस दौरान चेतावनी भी दी कि अगर काला कानून सरकार वापस नहीं लेती है तो हम कानून बनाने वालों का विरोध और तेज कर दिया जाएगा.
विधानसभा का बुलाएं विशेष सत्र
काला कानून मोर्चा के अध्यक्ष रघुनंदन शर्मा ने कहा कि एट्रोसिटी एक्ट मध्यप्रदेश में हम लागू नहीं होने देंगे. उन्होंने कहा कि एक्ट को लेकर प्रदेश सरकार को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर यह संकल्प पारित करना होगा कि हम इस एक्ट को मध्यप्रदेश में लागू नहीं करेंगे. उन्होंने कहा कि हमारा विरोध किसी राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं है, हमारा विरोध तो यह कानून बनाने वालों के खिलाफ है. उन्होंने कहा कि संसद में बैठें सांसदों ने इस कानून को अपने हित के लिए पास करा दिया. उन्होंने कहा कि समाज में गंदे नेता जातिवाद को बढ़ावा दे रहे हैं और समाजों के बीच खाई बना रहा है.

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