मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान द्वारा एट्रोसिटी एक्ट को लेकर दिए बयान कि बिना जांच के गिरफ्तारी नहीं होगी को लेकर प्रदेश के अजाक्स और सपाक्स संगठन के नेता मुख्यमंत्री से खफा हो गए हैं. आजक्स ने तो मुख्यमंत्री को भ्रम न फैलाने की नसीहत दी है तो सपाक्स ने कहा कि मुख्यमंत्री डेमेज कंट्रोल के लिए इस तरह की जुमलेबाजी कर रहे हैं.
एट्रोसिटी एक्ट को लेकर भाजपा के लिए संकट बने सवर्ण समाज को देखते हुए मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने गुरुवार को बालाघाट में यह घोषणा कर दी थी कि जब तक जांच नहीं होगी, तब तक गिरफ्तारी नहीं होगी. इस घोषणा के बाद मुख्यमंत्री के खिलाफ सवर्ण समाज का नेतृत्व कर रहे संगठन सपाक्स ने नाराजगी जाहिर की है.
सपाक्स का कहना है कि मुख्यमंत्री ने दबाव में आकर यह बात कही है. जब तक लिखित में नहीं मिलता, किसी की बात को नहीं माना जाएगा. सपाक्स के प्रदेश अध्यक्ष के.पी.साहू ने कहा कि मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान घोषणाएं तो बहुत कर चुके हैं. इन घोषणाओं पर अमल कहां किया है. अब जबकि सरकार दबाव में है भाजपा परेशान है तो इस तरह की घोषणा करके लोगों को भ्रमित कर रहे हैं. वे आदेश जारी करें, लिखित में दें तब कहीं उनकी बात को सही माना जाएगा. सपाक्स संगठन के सदस्य केदार सिंह तोमर का कहना है कि मुख्यमंत्री डैमेज कंट्रोल करने के लिए इस तरह की जुमलेबाजी कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि अगर मुख्यमंत्री की यही मंशा है तो संसद, विधानसभा का विशेष सत्र बुलवाएं और फैसला लें और आदेश जारी कराएं. इसके बाद ही कोई घोषणा करें, सिर्फ जुमेलीबाजी न करें.
वहीं अजाक्स संगठन के प्रवक्ता विजय शंकर श्रवण ने कहा कि संसद से पारित कानून को लेकर किसी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को इस तरह की बात करने से बचना चाहिए. उनके इस बयान से भ्रम की स्थिति निर्मित हो रही है. उन्होंने कहा कि हमारी मांग है कि संविधान में दी गई व्यवस्थाओं का अक्षरश: पालन हो. उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए राजनीति करने से बाज आज आना चाहिए. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की घोषणा सिर्फ दबाव और जल्दबाजी में लिया फैसला नजर आ रहा है.
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