शिवराज सरकार की तुलना केजरीवाल सरकार से
आम आदमी पार्टी ने मध्यप्रदेश ने आज ‘सरकार-सरकार में फर्क’ होता है और ‘अब बस’ कैंपेन जारी किए हैं. यह दोनों कैंपेन सोशल मीडिया के साथ-साथ जमीन पर डोर-टू-डोर कैंपेन के दौरान जनता तक ले जाए जाएंगे.
आम आदमी पार्टी की राष्ट्रीय आईटी एवं सोशल मीडिया टीम के प्रमुख अरविंद झा ने ‘सरकार-सरकार में फकर्’ होता है और ‘अब बस’ कैंपेन की लांचिंग के मौके पर पत्रकारों से चर्चा करते हुए बताया कि भाजपा मध्यप्रदेश में बता रही है कि ‘सरकार-सरकार में फर्क’ होता है, और इसके लिए वह 2003 की कांग्रेस सरकार से अपने 15 साल के कामकाज की तुलना कर रही है. हम भी मानते हैं कि ‘सरकार-सरकार में फर्क होता है’, लेकिन असली फर्क क्या होता है, यह हम इस कैंपेन के जरिए बताएंगे और दिल्ली सरकार के महज तीन साल के कामकाज की तुलना शिवराज सरकार के 15 साल से करेंगे. दिलचस्प यह है कि दिल्ली में महज 3 साल में जो काम हुए हैं, वह भाजपा की 15 साल की सरकार पर भारी हैं.
बदहाली को दर्शाया है कैंपेन में
झा ने बताया कि मध्यप्रदेश में भाजपा सरकार ने 15 साल में कोई ऐसा काम नहीं किया है, जिससे जनता को असल में कोई लाभ हुआ हो. ऐसे में प्रदेश में चारों ओर बदहाली और भ्रष्टाचार और लूट का राज है. इस स्थिति से मध्यप्रदेश की जनता अब निजात चाहती है. इसी भावना को ‘अब बस कैंपेन’ में बल दिया गया है कि अब ये सब कुछ नहीं चलेगा. इसके लिए आम जनता को अब बस का लोगो लगाकर जो भी गलत काम प्रदेश में हो रहा है, जैसे टूटी सड़कें, परेशान किसान, फसल की बर्बादी, बेरोजगारी, कुपोषण, स्वास्थ्य शिक्षा की बदहाली इनकी तस्वीरें खींचकर इन पर आलोक अग्रवाल जी की तस्वीर वाले ‘अब बस’ के लोगो लगाकर अपने फेसबुक, ट्विटर अकाउंट पर पोस्ट करना हैं और हमें भेजना है. यह लोगो तीन कलर में आम आदमी पार्टी की
बदहाली के अलावा कुछ नहीं मिला
आप के प्रदेश अध्यक्ष आलोक अग्रवाल ने कहा कि मध्य प्रदेश की सरकार के पिछले 15 साल के शासन में बदहाली के अलावा प्रदेश को कुछ भी नहीं मिला है. इसके विपरीत पिछले तीन साल में दिल्ली सरकार ने जो काम किया है, वह अभूतपूर्व है. आप ने ‘सरकार-सरकार में फर्क होता है’ कैंपेन के तहत वीडियो जारी किए हैं, जिनमें मध्य प्रदेश और दिल्ली सरकार की तुलना करते हुए शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, रोजगार आदि का फर्क दिखाया गया है. इन छह वीडियो में से हर एक में अलग-अलग मुद्दों पर दोनों सरकारों के बीच के फर्क को आंकड़ों और तथ्यों के माध्यम से सामने रखा गया है.
आम आदमी पार्टी ने मध्यप्रदेश ने आज ‘सरकार-सरकार में फर्क’ होता है और ‘अब बस’ कैंपेन जारी किए हैं. यह दोनों कैंपेन सोशल मीडिया के साथ-साथ जमीन पर डोर-टू-डोर कैंपेन के दौरान जनता तक ले जाए जाएंगे.
आम आदमी पार्टी की राष्ट्रीय आईटी एवं सोशल मीडिया टीम के प्रमुख अरविंद झा ने ‘सरकार-सरकार में फकर्’ होता है और ‘अब बस’ कैंपेन की लांचिंग के मौके पर पत्रकारों से चर्चा करते हुए बताया कि भाजपा मध्यप्रदेश में बता रही है कि ‘सरकार-सरकार में फर्क’ होता है, और इसके लिए वह 2003 की कांग्रेस सरकार से अपने 15 साल के कामकाज की तुलना कर रही है. हम भी मानते हैं कि ‘सरकार-सरकार में फर्क होता है’, लेकिन असली फर्क क्या होता है, यह हम इस कैंपेन के जरिए बताएंगे और दिल्ली सरकार के महज तीन साल के कामकाज की तुलना शिवराज सरकार के 15 साल से करेंगे. दिलचस्प यह है कि दिल्ली में महज 3 साल में जो काम हुए हैं, वह भाजपा की 15 साल की सरकार पर भारी हैं.
बदहाली को दर्शाया है कैंपेन में
झा ने बताया कि मध्यप्रदेश में भाजपा सरकार ने 15 साल में कोई ऐसा काम नहीं किया है, जिससे जनता को असल में कोई लाभ हुआ हो. ऐसे में प्रदेश में चारों ओर बदहाली और भ्रष्टाचार और लूट का राज है. इस स्थिति से मध्यप्रदेश की जनता अब निजात चाहती है. इसी भावना को ‘अब बस कैंपेन’ में बल दिया गया है कि अब ये सब कुछ नहीं चलेगा. इसके लिए आम जनता को अब बस का लोगो लगाकर जो भी गलत काम प्रदेश में हो रहा है, जैसे टूटी सड़कें, परेशान किसान, फसल की बर्बादी, बेरोजगारी, कुपोषण, स्वास्थ्य शिक्षा की बदहाली इनकी तस्वीरें खींचकर इन पर आलोक अग्रवाल जी की तस्वीर वाले ‘अब बस’ के लोगो लगाकर अपने फेसबुक, ट्विटर अकाउंट पर पोस्ट करना हैं और हमें भेजना है. यह लोगो तीन कलर में आम आदमी पार्टी की
बदहाली के अलावा कुछ नहीं मिला
आप के प्रदेश अध्यक्ष आलोक अग्रवाल ने कहा कि मध्य प्रदेश की सरकार के पिछले 15 साल के शासन में बदहाली के अलावा प्रदेश को कुछ भी नहीं मिला है. इसके विपरीत पिछले तीन साल में दिल्ली सरकार ने जो काम किया है, वह अभूतपूर्व है. आप ने ‘सरकार-सरकार में फर्क होता है’ कैंपेन के तहत वीडियो जारी किए हैं, जिनमें मध्य प्रदेश और दिल्ली सरकार की तुलना करते हुए शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, रोजगार आदि का फर्क दिखाया गया है. इन छह वीडियो में से हर एक में अलग-अलग मुद्दों पर दोनों सरकारों के बीच के फर्क को आंकड़ों और तथ्यों के माध्यम से सामने रखा गया है.
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