गुरुवार, 27 सितंबर 2018

दो बार ही दहाई के अंक तक पहुंची है बसपा

 सपा एक बार भी नहीं पहुंची दहाई अंक तक
 
मध्यप्रदेश में तीसरी ताकत बताने वाली बहुजन समाज पार्टी अब तक प्रदेश में अपना प्रभाव नहीं छोड़ पाई है. जब से प्रदेश में बसपा ने अपनी आमद दी है, उसके बाद से अब तक के चुनाव परिणाम यह बताते हैं कि वह दो मर्तबा ही दहाई के आंकड़े को छू पाई है. यही हाल कुछ समाजवादी पार्टी का है. सपा तो अब तक इस आंकड़े को एक बार भी नहीं छू पाई है.
राज्य में बहुजन समाज पार्टी ने अविभाजित मध्यप्रदेश में 1990 से चुनाव मैदान में उतरना शुरु किया. इस वर्ष बसपा ने राज्य की 320 सीटों पर 187 उम्मीदवार मैदान में उतारे थे, जिसमें से उसे 2 स्थानों पर जीत हासिल हुई थी. जबकि 171 स्थानों पर उसके प्रत्याशी अपनी जमानत भी नहीं बचा पाए थे. इसके बाद 1993 के चुनाव में बसपा ने 320 सीटोंं में से 287 सीटों पर चुनाव लड़ा और इस चुनाव में उसके 11 प्रत्याशी जीते, जबकि 234 प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई थी. इसी तरह 1998 में बसपा ने 170 स्थानों पर चुनाव लड़ा और फिर 11 स्थानों पर विजय हासिल की, इस चुनाव में बसपा के 120 प्रत्याशियों की जमानत जब्त हुई थी.
वर्ष 2000 में राज्य विभाजन के बाद जब छत्तीसगढ़ अलग राज्य बना और इसके बाद 2003 में जब विधानसभा चुनाव हुए तो बसपा ने मध्यप्रदेश की 230 विधानसभा सीटों पर 157 प्रत्याशियों को मैदान में उतारा, लेकिन इस चुनाव में उसके मात्र 2 ही प्रत्याशी विजय हासिल कर पाए. 122 प्रत्याशियों की जमानतें जब्त हुई थी. इसी तरह 2008 में बसपा ने 228 स्थानों पर चुनाव लड़ा और 7 स्थानों पर जीत हासिल की, इस चुनाव में उसके 182 प्रत्याशियों की जमानतें जब्त हुई थी. 2013 के विधानसभा चुनाव में बसपा ने पूरी ताकत के साथ 227 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ा और मात्र 4 स्थानों पर उसे जीत हासिल हुई. इस चुनाव में उसके 194 प्रत्याशियों की जमानत जब्त हुई थी.
बगावत करने वाले खोलते हैं सपा का खाता


मध्यप्रदेश में सपा का अपना वोट बैंक जरुर बना है, मगर जीतने वाले अधिकांश प्रत्याशी वे ही होते हैं, जो टिकट न मिलने पर भाजपा या फिर कांग्रेस छोड़कर सपा का थामन थामते हैं. सपा ने मध्यप्रदेश में 1998 में आमद दी और पहला चुनाव लड़ा. इस चुनाव में उसने राज्य की 320 सीटों में से 94 सीटों पर चुनाव लड़ा था, मगर जीत केवल 4 स्थानों पर मिली थी. इस चुनाव में उसके 84 प्रत्याशी अपनी जमानत नहीं बचा पाए थे. इसके बाद 2003 के विधानसभा चुनाव में सपा ने राज्य की 230 सीटों में से 161 पर प्रत्याशी उतारे, जिसमें उसे 7 पर विजय हासिल हुई. 146 प्रत्याशियों ने अपनी जमानत गंवाई थी. इस चुनाव में अधिकांश वे सपा के वे प्रत्याशी चुनाव जीते थे जो कांग्रेस से बगावत कर सपा में आए थे. इसके बाद 2008 के विधानसभा चुनाव में सपा ने 186 प्रत्याशी मैदान में उतारे और मात्र 1 स्थान पर विजय हासिल की थी. इस चुनाव में उसके 183 प्रत्याशी अपनी जमानत नहीं बचा पाए थे. इसी तरह 2013 के विधानसभा चुनाव में 164 प्रत्याशी मैदान में थे, मगर जीत किसी एक को भी नहीं मिली. इस चुनाव में सपा के 161 प्रत्याशियों को अपनी जमानत गंवानी पड़ी थी.

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें