मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार ने भले ही संतों को राज्यमंत्री का दर्जा देकर संत-महंतों को साधने का प्रयास किया था, मगर इनकी नाराजगी अब भी दूर नहीं हुई है. आज फिर संत-पुजारी संघ ने सरकार को चेतावनी दे डाली है कि अगर उनकी मांगों को जल्द पूरा नहीं किया तो वे आंदोलन करेंगे. साथ ही चेतावनी दी है कि भाजपा चुनाव में परिणाम भुगतने को तैयार रहे.
मध्यप्रदेश में संतों और पुजारियों की नाराजगी दूर नहीं हो रही है. सरकार के लिए संत-महंत और पुजारी अब भी चुनौती बने हुए हैं. संत-पुजारियों में 2008 के बाद से मानदेय न बढ़ाने को लेकर आक्रोश बढ़ता जा रहा है. राजधानी में आज संत-पुजारी संघ की बैठक संपन्न हुई. यह बैठक नेहरु नगर स्थित श्री सिद्धेश्वर शिव मंदिर में हुई. बैठक की अध्यक्षता भगवत आचार्य राकेश परमानंद ने की. संघ के अध्यक्ष पंडित नरेन्द्र दीक्षित ने कहा कि लंबे समय से सरकार उन्हें नजरअंदाज कर रही है. मनरेगा के हिसाब से भी उन्हें मासिक मानदेय नहीं दिया जा रहा है. साल में एक बार मिलने वाला अनुदान भी सरकार द्वारा रोक दिया गया है. प्रदेश सरकार सबकी मांगों को पूरा कर रही है, लेकिन संत-पुजारियों को सिर्फ और सिर्फ कोरे आश्वासन दे रही है. अगर सरकार ने जल्द ही हमारी मांगों को पूरा नही किया तो आने वाले समय मे प्रदेशभर में उग्र आंदोलन किया जाएगा. इसका परिणाम आगामी चुनाव में सरकार को भुगतना पड़ेगा. पंडित दीक्षित ने बताया कि अगर सरकार ने आचार संहिता लगने से पहले संतों और पुजारियों की मांगों को पूरा नहीं किया तो पुजारी मंदिरों-मठों में तालाबंदी आंदोलन शुरु कर देंगे. उन्होंने कहा कि जल्द ही सरकार के खिलाफ एक बड़े आंदोलन की रुपरेखा तय की जाएगी.
उल्लेखनीय है कि कुछ माह पूर्व ही सरकार ने संतों-महंतों की नाराजगी को दूर करने के लिए स्वामी नर्मदानंद, हरिहरानंद, कम्प्यूटर बाबा, योगेंद्र महंत को राज्यमंत्री का दर्जा प्रदान किया था. मगर संतों-महंतों की नाराजगी दूर नहीं हो पाई है.
मध्यप्रदेश में संतों और पुजारियों की नाराजगी दूर नहीं हो रही है. सरकार के लिए संत-महंत और पुजारी अब भी चुनौती बने हुए हैं. संत-पुजारियों में 2008 के बाद से मानदेय न बढ़ाने को लेकर आक्रोश बढ़ता जा रहा है. राजधानी में आज संत-पुजारी संघ की बैठक संपन्न हुई. यह बैठक नेहरु नगर स्थित श्री सिद्धेश्वर शिव मंदिर में हुई. बैठक की अध्यक्षता भगवत आचार्य राकेश परमानंद ने की. संघ के अध्यक्ष पंडित नरेन्द्र दीक्षित ने कहा कि लंबे समय से सरकार उन्हें नजरअंदाज कर रही है. मनरेगा के हिसाब से भी उन्हें मासिक मानदेय नहीं दिया जा रहा है. साल में एक बार मिलने वाला अनुदान भी सरकार द्वारा रोक दिया गया है. प्रदेश सरकार सबकी मांगों को पूरा कर रही है, लेकिन संत-पुजारियों को सिर्फ और सिर्फ कोरे आश्वासन दे रही है. अगर सरकार ने जल्द ही हमारी मांगों को पूरा नही किया तो आने वाले समय मे प्रदेशभर में उग्र आंदोलन किया जाएगा. इसका परिणाम आगामी चुनाव में सरकार को भुगतना पड़ेगा. पंडित दीक्षित ने बताया कि अगर सरकार ने आचार संहिता लगने से पहले संतों और पुजारियों की मांगों को पूरा नहीं किया तो पुजारी मंदिरों-मठों में तालाबंदी आंदोलन शुरु कर देंगे. उन्होंने कहा कि जल्द ही सरकार के खिलाफ एक बड़े आंदोलन की रुपरेखा तय की जाएगी.
उल्लेखनीय है कि कुछ माह पूर्व ही सरकार ने संतों-महंतों की नाराजगी को दूर करने के लिए स्वामी नर्मदानंद, हरिहरानंद, कम्प्यूटर बाबा, योगेंद्र महंत को राज्यमंत्री का दर्जा प्रदान किया था. मगर संतों-महंतों की नाराजगी दूर नहीं हो पाई है.
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