प्रदेश कांगे्रस मीडिया विभाग के उपाध्यक्ष भूपेन्द्र गुप्ता ने आरोप लगाया है कि शिवराज सरकार मंत्री परिषद के माध्यम से अपनी ही सरकार की नीतियों के विरुद्ध निर्णय कर अवैधानिक खनन गतिविधियों को बढ़ावा दे रही है.
गुप्ता ने बताया कि सरकार के मध्यप्रदेश गौण खनिज नियम की धारा-53 में उल्लेख किया है कि खनिज के अवैध परिवहन में पकड़े जाने पर पहली बार तीस गुना, दूसरी बार चालीस गुना, तीसरी बार पचास गुना, चैथी बार साठ गुना और पांचवी बार रायल्टी का सत्तर गुना दंड लगाने का प्रावधान है. इसके बाद वाहन राजसात किये जा सकते हैं. किंतु विगत दिवस मंत्रिमंडल द्वारा पहली बार वाहन राजसात से मुक्त रखने एवं दूसरी बार के बाद राजसात करने का निर्णय सरकार की स्वयं की बनायी नीति की अवहेलना है.
गुप्ता ने बताया कि मंत्रि परिषद में इस तरह का निर्णय लेना शिवराज सरकार की मजबूरी को दर्शाता है. क्योंकि पूर्व में ही फरवरी 2018 में नीलाम की गई रेत खदानों को सरेंडर करवाकर सुरक्षा निधी लौटाने का आपराधिक काम सरकार के कई चहेते अफसर कर चुके हैं. जिन्हें बचाने के लिए और स्वेच्छाचारितापूर्वक सरकार के खजाने को नुकसान पहुंचाने के अपराध से उन अफसरों की रक्षा हो सके. गुप्ता ने कहा कि जनहित में आवश्यक है कि सरकार 2013 से 2018 तक लिए गये खनन संबंधी निर्णयों की समीक्षा कर श्वेत-पत्र जारी करें. जिससे प्रदेश के मूल्यवान संसाधनों की चोरी की वास्तविकता उजागर हो सके. गुप्ता ने बताया है कि ग्वालियर के शताब्दीपुर एवं मऊ की गौण खनिज खदानों पर एयरफोर्स द्वारा सुरक्षा संबंधी आपत्तियां उठाये जाने के बावजूद बसाहट के क्षेत्रों में कराये जा रहे खनन से भी सरकार और खनन माफिया का गठबंधन उजागर होता है. जिस क्षेत्र में मिराज विमान उड़ते हैं, उसमें सुरक्षा संबंधी आपत्तियों को दरकिनार करना देश की सुरक्षा से खिलवाड़ करने के समतुल्य है. कांगे्रस पार्टी ऐसे संवेदनशील क्षेत्र में तत्काल खनन गतिविधियों पर रोक लगाने की मांग करती है.

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