बुधवार, 5 सितंबर 2018

पूरे जीवन चलने वाली प्रक्रिया है शिक्षा

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा है कि शिक्षा पूरे जीवन चलने वाली प्रक्रिया है, जिसकी शुरूआत माँ के गर्भ से ही हो जाती है. इस बात का उदाहरण महाभारत में अभिमन्यु के रूप में मिलता है.इसलिये जब बच्चा गर्भ में होता है, तभी से माँ को अच्छी पुस्तकें पढ़ना, मन में अच्छे विचार लाना तथा पोष्टिक आहार लेना चाहिए.
यह बात राज्यपाल ने आज शिक्षक दिवस के अवसर पर राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह में कही.राज्यपाल ने सम्मान समारोह में प्रदेश के लगभग 44 उत्कृष्ट शिक्षकों को शाल-श्रीफल और स्मृति चिंह भेंट कर सम्मानित किया.  राज्यपाल ने कहा कि शिक्षकों को विद्यार्थियों को नैतिकता का पाठ भी पढ़ाना चाहिये और अच्छे संस्कार देना चाहिए.बच्चों में स्वच्छता और अन्न की बचत की भावना बचपन से विकसित करना चाहिए.इससे बच्चे अच्छे नागरिक बन सकेंगे. बच्चों को भौगोलिक एवं ऐतिहासिक ज्ञान कराने के लिए प्रदेश और देश के पर्यटन स्थलों का भ्रमण करवाना चाहिये.खेल एवं चित्रकला आदि की सामग्री स्कूल द्वारा उपलब्ध करवाना चाहिए.उन्होंने कहा कि शिक्षकों को बच्चों की छोटी-छोटी गलतियों पर भी ध्यान देना चाहिए, तभी शिक्षा में सुधार आयेगा.राज्यपाल ने कहा कि ज्ञान और गुरू अतुल्य हैं, अमूल्य हैं, अनमोल हैं.माँ के अतिरिक्त शिक्षक ही होते हैं, जो बच्चों के विचारों को सही दिशा देने में सक्षम हैं, जिसका सर्वाधिक प्रभाव जीवन भर नजर आता है.उन्होंने कहा कि किसी राष्ट्र तथा विद्यार्थियों का चरित्र और उन्नति शिक्षकों में ही निहित है.शिक्षक हमें जिंदगी में एक जिम्मेदार और अच्छा इंसान बनने में मदद करते हैं.
स्कूल शिक्षा मंत्री  विजय शाह ने शिक्षकों से कहा कि अगर आप ईमानदारी से अपना दायित्व निभाएंगे, तो निश्चित ही हमारी नई पीढ़ी देश का नाम विश्व में रोशन करेगी.उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य शिक्षा को नई ऊचाईंयों तक पहुंचाना है.स्कूल शिक्षा राज्य मंत्री दीपक जोशी ने कहा कि शिक्षक राष्ट्र निमार्ता होते हैं.शिक्षक का सम्मान सर्वोपरि है.उनके नेतृत्व में ही हम स्वर्णिम मध्यप्रदेश बनाने में सफल होंगे.
सामान्य प्रशासन मंत्री लालसिंह आर्य ने कहा कि कुशल शिक्षकों के मार्गदर्शन में देश आगे बढ़ता रहेगा.प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा दीप्ति मुखर्जी ने स्वागत भाषण दिया.

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