मंगलवार, 11 सितंबर 2018

लिपिकों ने कहा मांग पूरी नहीं हुई तो भाजपा को वोट नहीं

मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार के लिए अब कर्मचारी भी मुसीबत बनते जा रहे हैं. प्रदेश के लिपिकों और  पंचायत कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ अपनी लंबित मांगों को लेकर एक बार फिर मोर्चा खोला है. लिपिकों ने तो चेतावनी दे डाली है कि अगर मांगे पूरी  नहीं होती है, तो वे भाजपा को वोट नहीं देंगे.
चुनावी साल में एक ओर जहां सरकार द्वारा कई घोषणाएं कर कर्मचारियों को साधने का प्रयास किया गया, वहीं  इन घोषणाओं के बाद खुद सरकार लिपिकों और पंचायत कर्मचारियों से घिरती नजर आ रही है. दरअसल ये कर्मचारी  वर्षों से अपनी मांगों को लेकर धरने, प्रदर्शन करते आ रहे हैं, मगर उनकी मांगे अब तक पूरी नहीं हुई है. चुनाव नजदीक आते देख अब फिर इन कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला है.
मध्यप्रदेश लिपिक वर्गीय शासकीय कर्मचारी संघ ने चेतावनी दी कि लिपिक अगली कैबिनेट का इंतजार कर रहे हैं, इसमें कमेटी की अनुशंसा लागू होने पर निर्णय नहीं हुआ तो 18 से 29 सितंबर तक प्रदेश भर में सौंगध सभा करेंगे. ये सभाएं ऐसी विधानसभा क्षेत्रों में की जाएगी, जहां पिछले चुनाव में भाजपा के उम्मीदवार 1 हजार से 2 हजार वोटों से जीते हैं. इन विधानसभा क्षेत्रों में लिपिक अपने परिवार व रिश्तेदारों के साथ सौगंध सभा कर भाजपा प्रत्याशियों को वोट नहीं देने का संकल्प लेंगे. 
गौरतलब है कि प्रदेश के लिपिक 23 जुलाई से हड़ताल कर रहे हैं. पिछले माह हड़ताल के दौरान वित्त मंत्री जयंत मलैया ने लिपिक संघ के पदाधिकारियों को बुला कर चर्चा की और आश्वस्त किया था कि  2 कैबिनेट की बैठक होने के बाद लिपिक संघ की मांग को पूरा करने का निर्णय लिया जाएगा. उनके आश्वासन के बाद लिपिक संघ ने हड़ताल स्थगित कर दी थी, लेकिन अभी तक कैबिनेट की तीन बैठक होने के बाद भी शासन ने लिपिक कर्मचारियों की मांग पूरी करने के लिए विचार नहीं किया. 
 पंचायत सचिवों का आंदोलन 18 को
बीते तीन सालों से पंचायत सचिव सरकार से नाराज चल रहे है, वे अपनी मांगों को लेकर कई बार धरना प्रदर्शन और आंदोलन कर चुके है. हर बार सरकार द्वारा उनकी मांगों का निराकरण तो किया जाता है लेकिन आधा अधूरा. इसके चलते पंचायत सचिवों में सरकार के प्रति आक्रोश व्याप्त हो गया है. पंचायतों सचिवों ने सरकार को चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने जल्द से जल्द उनकी मांगों को पूरा नहीं किया तो आगामी दिनों में प्रदेशभर में उनके द्वारा आंदोलन चलाया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी. इस बार लड़ाई आर या पार होगी.  मांगे पूरी ना होने पर नाराज पंचायत सचिवों ने 18  सितंबर को भोपाल में विशाल आंदोलन करने वाले है. 

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