प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने पेट्रोल- डीज़ल की आसमान छूती क़ीमतों व इनकी दरांे में हो रही रिकार्ड वृद्धि पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि कांग्रेस के समय पेट्रोल- डीज़ल की क़ीमतों में मामूली वृद्धि पर हो-हल्ला मचाने वाले, महँगाई को मुद्दा बनाने वाले भाजपा के ज़िम्मेदार नेता आज बढ़ती क़ीमतों पर मौन क्यों हंै? मूल्यवृद्धि पर अपने कार्यालय साइकल से जाने की घोषणा करने वाले प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह व उनके मंत्री आज कहाँ है, उनकी साइकले कहाँ है? उनकी साइकलों को क्या जंग लग गया है? नाथ ने कहा है कि जनता को महँगाई से राहत दिलवाने के लिये शिवराज सरकार पेट्रोल-डीज़ल को जीएसटी में लाने का प्रस्ताव पारित कर केन्द्र सरकार को क्यों नहीं भिजवा रही है? पेट्रोलियम मंत्री कई बार कह चुके है कि राज्य सरकारें यदि इस संबंध में सहमति का प्रस्ताव भिजवाए तो हम इन्हें जीएसटी में लेने को तैयार है ।फिर भी शिवराज सरकार न इस दिशा में कोई क़दम उठा रही है और न ही इन पर लगने वाले टैक्स की दरों में कोई कमी कर जनता को राहत देने का निर्णय ले रही है। शिवराज सरकार जनता को महँगाई से राहत दिलवाना ही नहीं चाहती है। महँगाई के नाम पर कांग्रेस के समय, भाजपा सिर्फ़ घडयाली आँसू बहाकर जनता को गुमराह करती थी , आज उनकी सच्चाई इस मौन से सामने आ चुकी है। कमलनाथ ने कहा कि केन्द्र सरकार, पेट्रोल पर 19.48 रुपये प्रति लीटर व डीज़ल पर 15.33 रुपये प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी वसूल रही है। वही राज्य की शिवराज सरकार पेट्रोल पर 28 फीसदी वेट के साथ 1 फीसदी सेस व चार रुपये लीटर अतिरिक्त कर के साथ लगभग 21.50 रुपये प्रति लीटर टैक्स वसूल रही है और डीज़ल पर 22 फीसदी वेट के और एक फीसदी सेस के साथ कुल 28.99 रुपये प्रति लीटर टेक्स वसूल रही है। कांग्रेस की केन्द्र सरकार के समय पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी 9.2 रुपये प्रति लीटर थी, जो आज 212 फीसदी की वृद्धि के साथ 19.48 हो चुकी है। वहीं डीज़ल पर केन्द्र की कांग्रेस सरकार के समय जो एक्साइज ड्यूटी 3.46 रुपये प्रति लीटर थी, जो 443 फीसदी की वृद्धि के साथ आज बढ़कर 15.33 रुपये प्रति लीटर हो चुकी है। यह अंतर कांग्रेस व भाजपा की सरकार में पेट्रोल- डीज़ल की दरो का है। कमलनाथ ने कहा कि जैसे-जैसे मोदी जी पेट्रोल-डीजल के भाव बढ़ाते गये, वैसे-वैसे शिवराज खजाना भरते गये। जहां वर्ष 2013-14 में वेट से प्रदेश के 5 हजार 417 करोड़ रूपये की आय प्रतिवर्ष होती थी, वहीं वर्ष 2017-18 में यह आय बढ़कर 9 हजार 300 करोड़ हो गयी। यानि 3 हजार 883 करोड़ रूपये प्रतिवर्ष मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार को वेट के कारण ज्यादा मिलने लगे। श्री नाथ ने कहा कि इतनी बढ़ी मूल्यवृद्धि के बावजूद कांग्रेस के समय हो-हल्ला मचाने वाले मुख्यमंत्री व तमाम भाजपा नेता आज मौन हैं? कांग्रेस इस सच्चाई को जनता के बीच लेकर जायेगी और इस मूल्यवृद्धि के विरोध में व टैक्स कम करने एवं इन्हें जीएसटी में लाने की माँग को लेकर पूरे प्रदेश में आंदोलन व प्रदर्शन करेगी। कांग्रेस इस मसले पर चुप नहीं बैठेगी व जनता को इस महँगाई से राहत दिलवाने को लेकर भाजपा सरकार के खिलाफ निरंतर मोर्चा खोलेगी। बुधवार, 5 सितंबर 2018
मूल्यवृद्धि के विरोध में साइकल चलाने वालों की आज साइकलें कहाँ है ?
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने पेट्रोल- डीज़ल की आसमान छूती क़ीमतों व इनकी दरांे में हो रही रिकार्ड वृद्धि पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि कांग्रेस के समय पेट्रोल- डीज़ल की क़ीमतों में मामूली वृद्धि पर हो-हल्ला मचाने वाले, महँगाई को मुद्दा बनाने वाले भाजपा के ज़िम्मेदार नेता आज बढ़ती क़ीमतों पर मौन क्यों हंै? मूल्यवृद्धि पर अपने कार्यालय साइकल से जाने की घोषणा करने वाले प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह व उनके मंत्री आज कहाँ है, उनकी साइकले कहाँ है? उनकी साइकलों को क्या जंग लग गया है? नाथ ने कहा है कि जनता को महँगाई से राहत दिलवाने के लिये शिवराज सरकार पेट्रोल-डीज़ल को जीएसटी में लाने का प्रस्ताव पारित कर केन्द्र सरकार को क्यों नहीं भिजवा रही है? पेट्रोलियम मंत्री कई बार कह चुके है कि राज्य सरकारें यदि इस संबंध में सहमति का प्रस्ताव भिजवाए तो हम इन्हें जीएसटी में लेने को तैयार है ।फिर भी शिवराज सरकार न इस दिशा में कोई क़दम उठा रही है और न ही इन पर लगने वाले टैक्स की दरों में कोई कमी कर जनता को राहत देने का निर्णय ले रही है। शिवराज सरकार जनता को महँगाई से राहत दिलवाना ही नहीं चाहती है। महँगाई के नाम पर कांग्रेस के समय, भाजपा सिर्फ़ घडयाली आँसू बहाकर जनता को गुमराह करती थी , आज उनकी सच्चाई इस मौन से सामने आ चुकी है। कमलनाथ ने कहा कि केन्द्र सरकार, पेट्रोल पर 19.48 रुपये प्रति लीटर व डीज़ल पर 15.33 रुपये प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी वसूल रही है। वही राज्य की शिवराज सरकार पेट्रोल पर 28 फीसदी वेट के साथ 1 फीसदी सेस व चार रुपये लीटर अतिरिक्त कर के साथ लगभग 21.50 रुपये प्रति लीटर टैक्स वसूल रही है और डीज़ल पर 22 फीसदी वेट के और एक फीसदी सेस के साथ कुल 28.99 रुपये प्रति लीटर टेक्स वसूल रही है। कांग्रेस की केन्द्र सरकार के समय पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी 9.2 रुपये प्रति लीटर थी, जो आज 212 फीसदी की वृद्धि के साथ 19.48 हो चुकी है। वहीं डीज़ल पर केन्द्र की कांग्रेस सरकार के समय जो एक्साइज ड्यूटी 3.46 रुपये प्रति लीटर थी, जो 443 फीसदी की वृद्धि के साथ आज बढ़कर 15.33 रुपये प्रति लीटर हो चुकी है। यह अंतर कांग्रेस व भाजपा की सरकार में पेट्रोल- डीज़ल की दरो का है। कमलनाथ ने कहा कि जैसे-जैसे मोदी जी पेट्रोल-डीजल के भाव बढ़ाते गये, वैसे-वैसे शिवराज खजाना भरते गये। जहां वर्ष 2013-14 में वेट से प्रदेश के 5 हजार 417 करोड़ रूपये की आय प्रतिवर्ष होती थी, वहीं वर्ष 2017-18 में यह आय बढ़कर 9 हजार 300 करोड़ हो गयी। यानि 3 हजार 883 करोड़ रूपये प्रतिवर्ष मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार को वेट के कारण ज्यादा मिलने लगे। श्री नाथ ने कहा कि इतनी बढ़ी मूल्यवृद्धि के बावजूद कांग्रेस के समय हो-हल्ला मचाने वाले मुख्यमंत्री व तमाम भाजपा नेता आज मौन हैं? कांग्रेस इस सच्चाई को जनता के बीच लेकर जायेगी और इस मूल्यवृद्धि के विरोध में व टैक्स कम करने एवं इन्हें जीएसटी में लाने की माँग को लेकर पूरे प्रदेश में आंदोलन व प्रदर्शन करेगी। कांग्रेस इस मसले पर चुप नहीं बैठेगी व जनता को इस महँगाई से राहत दिलवाने को लेकर भाजपा सरकार के खिलाफ निरंतर मोर्चा खोलेगी।
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