प्रदेश में खेती को लाभ का धंधा बनाने के लिए राज्य सरकार विभिन्न योजनाओं में किसानों को मदद कर रही है. किसानों को कृषि की आधुनिक तकनीक की जानकारी भी दी जा रही हैं. किसानों ने योजनाओं का लाभ लेकर खेती की आमदनी को दोगुना करने का रास्ता अपना लिया है.
रायसेन जिले के ग्राम सदालतपुर के किसान तैयब खान उन प्रगतिशील किसानों में शामिल हैं, जिन्होंने मुख्यमंत्री सोलर पंप योजना का लाभ लेकर अपने खेत में 5 एचपी सोलर सबमर्सिबल पंप लगवाया है. इसके लिए उन्हें मात्र 72 हजार रुपए ही देने पड़े. वे अपने 22 एकड़ के खेत में सौर ऊर्जा से बिजली बनाकर सोलर मोटर पंप से सिंचाई कर रहे हैं. तैयब खान ने अपने खेत में आम का बगान लगाया है, जिसमें सोलर पंप से सिंचाई करते हैं. सोलर पंप लगाने के लिए उन्हें कुल कीमत का 85 प्रतिशत भाग सब्सिडी के रूप में मिला है. सोलर पंप से सिंचाई सस्ती हुई है और इससे उनकी खेती की लागत में भी काफी कमी आई है.
विदिशा किसान कल्याण विभाग की मदद से ग्राम नागौर के किसान मुकेश रघुवंशी ने रासायनिक खेती की जगह जैविक खेती को अपनाया है. उन्होंने अपने खेत में पांच नाडेप पिट्स भी बनवाए हैं, जिसमें गोबर, मिट्टी, भूसा का भण्डारण करते हैं ताकि जरूरत पड़ने पर अपने खेत में जैविक खाद का उपयोग सुगमता कर सकें. कृषक मुकेश ने परंपरागत फसलों के साथ-साथ सब्जी उत्पादन की ओर भी कदम बढ़ाए हैं, इसके लिए उन्हें उद्यानिकी विभाग की मदद से प्रशिक्षण दिलाया गया. किसान मुकेश की गिनती क्षेत्र में प्रकृतिशील किसान के रूप में होती है. वे अपने क्षेत्र के अन्य किसानों को भी सोलर सिंचाई पंप लगाने का मशवरा देते हैं.
रायसेन जिले के ग्राम सदालतपुर के किसान तैयब खान उन प्रगतिशील किसानों में शामिल हैं, जिन्होंने मुख्यमंत्री सोलर पंप योजना का लाभ लेकर अपने खेत में 5 एचपी सोलर सबमर्सिबल पंप लगवाया है. इसके लिए उन्हें मात्र 72 हजार रुपए ही देने पड़े. वे अपने 22 एकड़ के खेत में सौर ऊर्जा से बिजली बनाकर सोलर मोटर पंप से सिंचाई कर रहे हैं. तैयब खान ने अपने खेत में आम का बगान लगाया है, जिसमें सोलर पंप से सिंचाई करते हैं. सोलर पंप लगाने के लिए उन्हें कुल कीमत का 85 प्रतिशत भाग सब्सिडी के रूप में मिला है. सोलर पंप से सिंचाई सस्ती हुई है और इससे उनकी खेती की लागत में भी काफी कमी आई है.
विदिशा किसान कल्याण विभाग की मदद से ग्राम नागौर के किसान मुकेश रघुवंशी ने रासायनिक खेती की जगह जैविक खेती को अपनाया है. उन्होंने अपने खेत में पांच नाडेप पिट्स भी बनवाए हैं, जिसमें गोबर, मिट्टी, भूसा का भण्डारण करते हैं ताकि जरूरत पड़ने पर अपने खेत में जैविक खाद का उपयोग सुगमता कर सकें. कृषक मुकेश ने परंपरागत फसलों के साथ-साथ सब्जी उत्पादन की ओर भी कदम बढ़ाए हैं, इसके लिए उन्हें उद्यानिकी विभाग की मदद से प्रशिक्षण दिलाया गया. किसान मुकेश की गिनती क्षेत्र में प्रकृतिशील किसान के रूप में होती है. वे अपने क्षेत्र के अन्य किसानों को भी सोलर सिंचाई पंप लगाने का मशवरा देते हैं.
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