मध्यप्रदेश में कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ फिर मोर्चा खोला है. लिपिकों ने राजधानी भोपाल में वित्त मंत्री जयंत मलैया के बंगले का घेराव किया. वेतन विसंगितयों सहित अन्य मांगों को लेकर लिपिकों ने यह घेराव किया और धरना देकर बैठ गए. लिपिक कर्मचारी अपन साथ भोजन सामग्री भी लाए है. इनका कहना है कि जब तक उनकी मांगे पूरी नहीं हो जाती वे यहां से नहीं जाएंगे.
लिपिकों का कहना है कि सरका ने 2015 में लिपिकों की मांगों को पूरा करने के लिए रमेशचन्द्र शर्मा समिति का गठन किया था. इस समिति ने भी लिपिकों का वेतन बढ़ाने की अनुशंसा की थी, इसके बावजूद सरकार समिति की अनुशंसाएं लागू नहीं कर ही हैं. अपनी इस मांग को लेकर बुधवार को लिपिक, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों ने वित्तमंत्री जयंत मलैया के बंगले का घेराव किया और वहीं धरने पर बैठ गए. लिपिकों का आरोप है कि सरकार ने अपना वादा नहीं निभाया सरकार की हठधर्मिता के चलते कर्मचारी परेशान हैं.
सरकारी कर्मचारियों ने रमेशचंद्र शर्मा समिति की 23 कर्मचारी हितैषी अनुशंसा शीघ्र लागू करने की मांग की है. इसके अलावा उनका कहना है कि अर्जित अवकाश संग्रहण की सीमा 240 से बढ़ाकर 300 दिवस करने, सेवानिवृत्त तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों से की जाने वाली वसूली बंद करने की मांग है. उनकी मांग है, जीपीएफ पेंशन योजना का भी लाभ दिया जाए, भारत सरकार एवं राज्यों की भाटी मंत्रालयीन अनुभाग अधिकारी निज सचिव का वेतनमान आठ हजार किया जाए, सचिवालय भत्ते क पुनरीक्षण मंत्रालयीन स्टेनो टाइपिस्ट के तृतीय समयमान को अन्य संवर्गो की भांति संसोधित किया जाए.
बनाएंगे दाल बाटी और बैठे रहेंगे धरने पर
वित्त मंत्री जयंत मलैया के निवास पहुंचे लिपिक कर्मचारियों ने अपने साथ भोजन सामग्री लेकर आए हैं. लिपिकों का कहना है कि यह सामग्री इस लिए लाए कि जब तक उनकी मांगे पूरी नहीं होगी, तब तक उनका धरना जारी रहेगा. इस दौरान किसी कर्मचारी का स्वास्थ्य खराब न हो, इसके लिए वे अपने साथ भोज्य सामग्री लेकर आए हैं. वे धरना स्थल पर ही दाल-बाटी बनाकर खाएंगे और धरना जारी रखेंगे. कर्मचारियों के धरने को देखते हुए पुलिस बल तैनात कर दिया गया है, वैसे धरना दे रहे कर्मचारी शांतिपूर्ण ढंग से अपनी मांगों को लेकर विरोध कर रहे हैं.
मंत्री पहुंचे लिपिकों के पास, कहा टूट गया न वादा
अपने निवास पर लिपिक कर्मचारियों के प्रदर्शन और धरने को देख वित्त मंत्री जयंत मलैया ने पहले तो कर्मचारियों के प्रति सहजता दिखाई और वे उनके पास पहुंचे. जब वित्त मंत्री लिपिको से चर्चा के लिए पहुंचे तो लिपिकों ने उन्हें फूलों का गुलस्ता देकर स्वागत किया. लिपिकों ने मंत्री से कहा कि आपने हमने हमारी मांगों को लेकर जो वादा किया था, उसका क्या हुआ?, आपने अन्य कर्मचारियों का वेतन बढ़ाया, मगर हमारी मांगों और वेतन वृद्धि पर ध्यान नहीं दिया. इस पर वित्त मंत्री ने लिपिकों से कहा कि टूट गया न वादा... और वे वहां से बिना कुछ बोले अपने बंगले में चले गए.
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