शनिवार, 17 फ़रवरी 2018

अब दिल्ली जाने की तैयारी

 हरदा जिले के  टिमरनी के बांस शिल्पकार स्वसहायता समूह द्वारा तैयार सामग्री अब दिल्ली में शहर की छाप छोड़ेगी। करीब 5 लाख की सामग्री को डिस्प्ले किया जाएगा। पिछले दिनो भोपाल वन मेले में इसी स्वसहायता समूह द्वारा 58 हजार रू की बांस से तैयार की गई सामग्री बेची गई थी। सब खर्चे काट कर 17 हजार रू बचाए। वन विभाग बैतूल जिले के घोड़ाडोंगरी से लाए गए बांस से टिमरनी के कलाकारों से सामग्री तैयार करवा रहा है। वन विभाग के अधिकारियों के मार्गदर्शन में बांस से बनी सामग्री तीन केमिकल से तैयार की जा रही है, जो 10 साल तक खराब नहीं होगी। यह सामग्री सौ रूपए से लेकर 10 हजार तक बिकेगी। प्लास्टिक व कांच की सामग्री कुछ ही महीनों व वर्षो में खराब हो जाती है। इसके विकल्प के रूप में टिमरनी का वन उत्पाद मण्डल बांस से बनी सामग्री तैयार करवा रहा है। जो प्रदेशभर में अपनी साख बनाने के बाद अब देश की राजधानी दिल्ली में बिकेगी। लोगों को बांस से बनी सामग्री की गुणवत्ता बताने के लिये दिल्ली में 10 से 12 मार्च तक 3 दिनों तक प्रदर्शनी लगेगी। बंशी एम्पोरियम टिमरनी के प्रभारी श्री गिरीश बिल्लौरे ने बताया कि बैतूल जिले के घोड़ाडोंगरी से मोटे बांस लाकर कारीगर मशीनों से सामग्री तैयार कर रहे हैं। यह सामग्री कम से 10 साल तक चलेगी। प्रदेश के इन्दौर, भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर समेत अन्य शहरों में लागों द्वारा पसन्द की जा रही है। अब दिल्ली में करीब 5 लाख की सामग्री को डिस्प्ले किया जाएगा। वन विभाग द्वारा घोड़ाडोंगरी और रानीपुर क्षेत्र के जंगलों से मोटे बांस लाए जा रहे है, जो सागौन की मोटी बल्ली के बराबर होते है। इसे विभाग तार फेंसिंग के लिये पोल बनाने में उपयोग कर रहा है। सीमेन्ट के एक पोल की कीमत लगभग 150 रूपए आती है। यह पोल मात्र 2 से 3 साल में ही खराब होने लगते है। कई जगहों से टूट जाते हैं। एक पोल के टूटने पर एक साथ दो से तीन पोल को भी नुकसान होता है। जबकि बांस के 50 रूपए का पोल 10 साल तक चलेगा।बांस से बैलगाड़ी, नाइट लैंप, घड़ी, फ्लावर पॉट, पेन स्टेण्ड, मॉडर्न चाय सेट, टेबल लैंप, डायनिंग टेबल, डस्टबिन, आरामदायक कुर्सी, सोफा सहित कई सामग्री टिमरनी व सोडलपुर के कलाकारों द्वारा बनाई जा रही है।श्री बिल्लौरे ने बताया कांच व प्लास्टिक कांच की सामग्री कुछ महीनों में खराब होने लगती है, लेकिन बांस से बनी सामग्री हमेशा सुन्दर लगती है। इसे तैयार करने में तीन केमिकल का प्रयोग किया जा रहा है। इसमें बोरिक एसिड, फॉरेक्स और बीसीबी है। जिसके जरिए सुन्दर व टिकाऊ सामग्री तैयार हो रही है। इसकी बिक्री से प्राप्त होने वाली आय से मजदूरों व नई मशीनों को खरीदा जा रहा है। जिससे कि गुणवत्ता व कार्य में तेजी आ सकें।

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