गुरुवार, 1 फ़रवरी 2018

संतरा और अमरूद की जैविक पद्धत्ति से खेती

मध्यप्रदेश के सतना जिले की बिरसिंहपुर तहसील के पगारकला निवासी 45 वर्षीय किसान विष्णु तिवारी के खेतों में सुन्दर और स्वादिष्ट संतरे की खेती लोगों के आकर्षण का केन्द्र बनाइ गई है. स्थानीय बाजार में इनके संतरों की बड़ी माँग भी है.  विष्णु तिवारी अपने खेतों मे गेंहूँ और चना की परम्परागत फसल के साथ संतरे का उत्पादन भी कर रहे हैं.  किसान विष्णु तिवारी का बाग मीठे संतरे के फलों से गुलजार है. एक एकड़ मे लगाए गए संतरे के पौधों से हर वर्ष 4-5 लाख रुपये की आमदनी आसानी से हो रही है. स्थानीय बाजार में इनका संतरा 30-40 रुपए प्रति किलो के मान से हमेशा ही बिकता है. संतरे की खेती से उत्साहित होकर विष्णु और अधिक क्षेत्र में संतरे की नई कलमें लगा रहे हैं. संतरे की खेती को अपनी आय का मुख्य साधन बनाना चाहते हैं विष्णु. इनके संतरे के बाग और आमदनी देखकर गाँव के दो अन्य किसानों ने भी संतरे के बाग लगाये हैं. विष्णु तिवारी का कहना है कि वे जीरो बजट की खेती अर्थात जैविक खेती कर रहे हैं. रासायनिक खाद, कीटनाशक एवं महंगे संसाधनों का प्रयोग नही करते हैं. मौसमी खेती के साथ ही संतरे और अमरूद की बागवानी कर अपनी आय में कई गुना इजाफा कर रहे हैं. कृषि विज्ञान केन्द्र के कृषि वैज्ञानिको की राय में चित्रकूट क्षेत्र की जलवायु भी बागवानी के लिये सर्वथा अनुकूल है. पगारकला गाँव में संतरे की लाभकारी खेती देखकर आसपास के गाँवों के किसान भी इसे अपना रहे हैं.

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